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Candida auris: एक खतरनाक फंगस जो स्वास्थ्य के लिए बन रहा है गंभीर चुनौती

Candida auris, एक खतरनाक फंगस, जो सामान्य दवाओं के प्रति प्रतिरोधी है, अब 60 से अधिक देशों में फैल चुका है। यह विशेष रूप से अस्पतालों में गंभीर खतरा बन गया है, जहां यह कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों की चिंता इस फंगस के उपचार के सीमित विकल्पों को लेकर है। जानें इसके बारे में और क्या उपाय किए जा सकते हैं।
 

Candida auris का बढ़ता खतरा


दुनिया एक बार फिर एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही है, जिसका नाम है Candida auris (सी. ऑरिस)। यह एक ऐसा फंगस है जो सामान्य दवाओं के प्रति प्रतिरोधी है। इसकी पहचान सबसे पहले 2009 में जापान में हुई थी, लेकिन अब यह धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर फैल चुका है। वर्तमान में, यह 60 से अधिक देशों में पाया जा चुका है और कई स्वास्थ्य संगठनों द्वारा इसे एक गंभीर खतरा माना जा रहा है.


Candida auris की खतरनाक विशेषताएँ

Candida auris की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह ड्रग-रेजिस्टेंट है, यानी सामान्य एंटीफंगल दवाएं इस पर प्रभावी नहीं होतीं। अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) ने इसे 'Urgent Antimicrobial Threat' की श्रेणी में रखा है। यह पहली बार है जब किसी फंगल संक्रमण को इतना गंभीर माना गया है। अमेरिका में इसके लगभग 7,000 मामले सामने आ चुके हैं और यह संक्रमण 27 राज्यों में फैल चुका है.


अस्पतालों में बढ़ता खतरा

यह फंगस विशेष रूप से अस्पतालों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। Candida auris इंसानी त्वचा और अस्पताल की सतहों पर लंबे समय तक जीवित रह सकता है। वेंटिलेटर पर मौजूद मरीज, आईसीयू में भर्ती लोग और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, वे इसके सबसे आसान शिकार बन जाते हैं। यदि यह फंगस अस्पताल के वातावरण में फैल जाए, तो इसे पूरी तरह से खत्म करना अत्यंत कठिन हो जाता है। कई बार सामान्य सफाई और कीटाणुनाशक भी इस पर प्रभाव नहीं डालते.


वैज्ञानिकों की चिंताएँ

वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि मौजूदा उपचार विकल्प सीमित हैं। Hackensack Meridian Center for Discovery and Innovation की एक रिपोर्ट के अनुसार, नई पीढ़ी की एंटीफंगल दवाओं की आवश्यकता है। इसके साथ ही, बेहतर और तेज जांच तकनीक और भविष्य में वैक्सीन आधारित उपचार पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। हाल ही में एक अध्ययन में यह भी पता चला है कि यह फंगस शरीर के अंदर आयरन प्राप्त करने के लिए विशेष जीन का उपयोग करता है। यदि इस प्रक्रिया को रोका जा सके, तो नए उपचार के रास्ते खुल सकते हैं.