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eBay का पत्रकारों के खिलाफ घिनौना षड्यंत्र: 56 मिलियन डॉलर का जुर्माना और सजा

eBay ने पत्रकारों के खिलाफ किए गए उत्पीड़न के मामले में 56 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमति जताई है। यह मामला 2019 में शुरू हुआ था जब एक पत्रकार दंपत्ति ने कंपनी की नीतियों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके बाद कंपनी ने उन्हें चुप कराने के लिए आपराधिक तरीके अपनाए। जानें इस मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
 

कॉर्पोरेट जगत में एक गंभीर मामला


नई दिल्ली: एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें पत्रकारों को प्रताड़ित करने और निष्पक्ष रिपोर्टिंग को दबाने का आरोप है। अमेरिकी ई-कॉमर्स दिग्गज eBay ने अपने खिलाफ चल रहे 6 साल पुराने कानूनी विवाद में हार मानते हुए 56 मिलियन डॉलर (लगभग 470 करोड़ रुपये) का जुर्माना भरने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही, कंपनी को यह स्वीकार करना पड़ा कि उसके अधिकारियों ने एक निष्पक्ष पत्रकार दंपत्ति की आवाज को दबाने के लिए आपराधिक तरीके अपनाए थे।


छह साल का संघर्ष

अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पीड़ित 'स्टाइनर दंपत्ति' को 48.7 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने और लगभग 7 मिलियन डॉलर का सामाजिक दान करने का आदेश दिया है। इस मामले में शामिल eBay के सात पूर्व कर्मचारियों को दोषी ठहराते हुए 5 साल तक की जेल की सजा भी सुनाई गई है। पीड़ित पक्ष के वकील क्रिस्टोफर मर्फी ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि यह समझौता कॉर्पोरेट जगत को एक स्पष्ट संदेश देता है कि कोई भी कंपनी पत्रकारों का उत्पीड़न नहीं कर सकती।


मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 2019 में शुरू हुआ जब डेविड स्टाइनर और इना स्टाइनर, जो 'eCommerceBytes' नामक ई-कॉमर्स न्यूजलेटर चलाते हैं, ने eBay की व्यावसायिक नीतियों पर रिपोर्ट प्रकाशित की। कंपनी के उच्च अधिकारियों ने इस रिपोर्टिंग से नाराज होकर दंपत्ति को चुप कराने का षड्यंत्र रचा, जिसमें जीवित कॉकरोच भेजना और खून से लथपथ सुअर का मास्क भेजना शामिल था।


पारदर्शिता का महत्व

कंपनी ने 2024 में 30 मिलियन डॉलर देकर इस मामले को कोर्ट के बाहर सुलझाने की कोशिश की, लेकिन स्टाइनर दंपत्ति ने इससे इनकार कर दिया। इना स्टाइनर ने कहा कि उनकी लड़ाई पैसे से ज्यादा सच को सामने लाने की थी। उन्होंने कहा कि वे चाहते थे कि यह मामला पूरी तरह से सार्वजनिक हो, ताकि भविष्य में किसी अन्य पत्रकार के साथ ऐसी हैवानियत करने से पहले कंपनियां सोचें।