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अमेरिका में कार: भारतीय महिला ने बताया कैसे बदलता है नजरिया

दृष्टि बलदेवा ने एक वीडियो में अमेरिका और भारत के बीच कार की भूमिका में अंतर को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में कार न होना जीवन को कैसे प्रभावित करता है, जबकि भारत में इसे स्टेटस सिंबल माना जाता है। वीडियो में उन्होंने बताया कि अमेरिका में ड्राइविंग सीखना और कार खरीदना कितनी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, उन्होंने सार्वजनिक परिवहन की कमी के बारे में भी चर्चा की। इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने अपनी सहमति जताई है।
 

भारत बनाम अमेरिका: कार की भूमिका


नई दिल्ली: भारत में कार को अक्सर सामाजिक स्थिति और आराम का प्रतीक माना जाता है, लेकिन अमेरिका में यह धारणा पूरी तरह बदल जाती है। दृष्टि बलदेवा, जो अमेरिका में रह रही हैं, ने हाल ही में एक वीडियो के माध्यम से इस अंतर को उजागर किया है। उनका कहना है कि भारत में जो गाड़ी स्टेटस सिंबल है, अमेरिका में वही जीवन के लिए आवश्यक बन जाती है। उनके अनुसार, यदि आपके पास अमेरिका में अपनी कार नहीं है, तो आपकी स्थिति घर में कैद रहने जैसी हो जाती है।


ड्राइविंग का महत्व

दृष्टि बलदेवा ने बताया कि अमेरिका में पढ़ाई या नौकरी के लिए आने वाले युवाओं के लिए एक महीने के भीतर ड्राइविंग सीखना और कार खरीदना अनिवार्य हो जाता है। बिना निजी वाहन के यात्रा करना, दफ्तर जाना, खरीदारी करना या आपातकालीन काम करना बेहद कठिन हो जाता है। अमेरिका में कार अब केवल शौक नहीं, बल्कि जीवन की एक आवश्यक शर्त बन चुकी है।


सार्वजनिक परिवहन की कमी

दृष्टि बलदेवा ने अपने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में अमेरिका की परिवहन व्यवस्था की वास्तविकता को दर्शाया। उन्होंने बताया कि भारत के शहरों में हर दो मिनट में ऑटो-रिक्शा, बस, ई-रिक्शा, कैब या मेट्रो उपलब्ध होते हैं, जिससे यात्रा करना आसान होता है। इसके विपरीत, अमेरिका के अधिकांश हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था बहुत कमजोर है। बसों के लिए चालीस से पैंतालीस मिनट तक इंतज़ार करना पड़ता है और पैदल चलने के लिए फुटपाथ भी सीमित हैं। उदाहरण के लिए, किराने का सामान लाने के लिए लोगों को लगभग 16 किलोमीटर (10 मील) तक गाड़ी चलानी पड़ती है। रोज़ाना उबर जैसी सेवाओं पर 50 से 60 डॉलर खर्च करना किसी के लिए भी लंबे समय तक संभव नहीं होता।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने दी अपनी सहमति


वीडियो वायरल होते ही कई प्रवासी भारतीयों और अन्य यूज़र्स ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं। अधिकांश लोगों ने दृष्टि की बातों से सहमति जताई। एक यूज़र ने लिखा कि अमेरिका का पूरा ढाँचा गाड़ियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जबकि एक अन्य ने सुझाव दिया कि भारत से अमेरिका जाने वाले हर नए व्यक्ति को इस सच्चाई के बारे में पहले से जान लेना चाहिए।