एक इंजीनियर से संन्यासी बनने की अनोखी यात्रा: क्या है इस बाबा की कहानी?
संन्यास का अनोखा सफर
नई दिल्ली: संन्यास का अर्थ अक्सर सांसारिक बंधनों से मुक्ति माना जाता है, लेकिन क्या कोई व्यक्ति भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जैसी प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर हिमालय की गोद में जा सकता है? उत्तराखंड के पहाड़ों से एक वायरल वीडियो ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें एक पूर्व इंजीनियर अब संन्यासी बनकर जीवन का ज्ञान साझा कर रहा है।
कौन है यह वायरल बाबा?
यह वीडियो ट्रैवल क्रिएटर मोहित पंवार द्वारा इंस्टाग्राम पर साझा किया गया है। मोहित वर्तमान में गंगोत्री की यात्रा पर हैं और पेशेवर रूप से पोर्ट्रेट और डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर हैं। पहाड़ों में घूमते हुए उनकी मुलाकात एक साधु से हुई, जो दिखने में साधारण हैं, लेकिन उनकी कहानी असाधारण है।
BARC से संन्यास की कहानी
वीडियो में बाबा बताते हैं कि उन्होंने 2002 में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बी.टेक किया। इसके बाद उनका चयन भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में हुआ। उन्होंने मुंबई में 6 महीने से एक साल तक प्रशिक्षण लिया और फिर एम.टेक किया। सब कुछ सही चल रहा था, एक शानदार करियर उनके सामने था, लेकिन उन्होंने सब कुछ छोड़ने का निर्णय लिया।
बाबा ने बताया कि संन्यास लेने के बाद एक दिन उनके CEO ने फोन किया और पूछा कि वह कहां हैं। बाबा ने उत्तर दिया कि वह संन्यासियों के साथ हैं। यह सुनकर CEO ने उन्हें पागल तक कह दिया, लेकिन उनके लिए यही सही रास्ता था।
जीवन की सच्चाई
अब पहाड़ों में रहने वाले इस संन्यासी की बातें लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं। वीडियो में वह कहते हैं, "जन्म और मृत्यु एक ही समय पर हैं, बीच का जो थोड़ा सा समय है, वही जीवन है। जीवन बहुत छोटा है।"
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
मोहित ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, "एक इंजीनियर ने BARC में अपनी नौकरी छोड़ दी और संन्यासी बन गया।" वीडियो वायरल होते ही कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने लिखा, "उसके दांत मेरे भविष्य से ज्यादा चमकदार हैं।" दूसरे ने कहा, "हमेशा एक इंजीनियर ही क्यों होता है?" कई लोगों ने लिखा कि वे खुद को 5 साल बाद इसी रूप में देखते हैं, तो किसी ने कहा, "सैलरी भले जीरो हो, लेकिन शांति पूरी मिल रही है।"