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क्या ऑफिस में लंच ब्रेक के लिए 30 मिनट का नियम है? जानें वायरल नोटिस की सच्चाई

हाल ही में एक ऑफिस नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें लंच ब्रेक के लिए केवल 30 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। यदि कोई कर्मचारी इस समय से 1 मिनट भी अधिक लेता है, तो उसे एक घंटा अतिरिक्त काम करना होगा। इस नियम ने इंटरनेट पर गुस्से की लहर पैदा कर दी है, और लोग इसे कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न मान रहे हैं। क्या यह नोटिस असली है या किसी का प्रैंक? जानें इस विवाद की पूरी कहानी और लोगों की प्रतिक्रियाएं।
 

नई दिल्ली में वायरल ऑफिस नोटिस


नई दिल्ली: कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम के बढ़ते दबाव और 'टॉक्सिक वर्क कल्चर' पर चर्चा अक्सर होती रहती है। हाल ही में, सोशल मीडिया पर एक ऑफिस नोटिस तेजी से वायरल हुआ है, जिसने इस बहस को एक नया मोड़ दिया है। इस नोटिस में लंच ब्रेक के लिए एक अजीब नियम का उल्लेख किया गया है, जिसने इंटरनेट यूजर्स के बीच गुस्से की लहर पैदा कर दी है।


वायरल नोटिस का विवरण

इस वायरल नोटिस में कर्मचारियों को लंच टाइमिंग का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है। ऑफिस में लंच ब्रेक के लिए केवल 30 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यदि कोई कर्मचारी इस समय सीमा से 1 मिनट भी अधिक (31 मिनट) लेता है, तो उसे शाम को 1 घंटा अतिरिक्त काम करना होगा। नोटिस के अंत में एक असंवेदनशील संदेश भी लिखा गया है, 'ईट फास्टर' (जल्दी खाओ)।


If your management writes policies like this, don't be surprised when your best employees write resignation emails. pic.twitter.com/3v5jZGA3XS

— Nalini Unagar (@NalinisKitchen) June 22, 2026



लोगों की प्रतिक्रिया

जैसे ही यह नोटिस सोशल मीडिया पर सामने आया, यह चर्चा का विषय बन गया। लोग इस नियम की कठोरता और तर्कहीनता पर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न बताया है। कुछ ने तंज करते हुए कहा कि अगर कंपनियां 1 मिनट की देरी पर 1 घंटे का काम ले सकती हैं, तो कर्मचारियों को भी तय समय के बाद हर एक मिनट के लिए 1 घंटे की अतिरिक्त सैलरी मांगनी चाहिए।


नोटिस की वास्तविकता

इस विवाद के बीच, इस नोटिस की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि वायरल हो रहे इस दस्तावेज पर किसी कंपनी का नाम, लोगो या किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं। ऐसे में कई लोगों का मानना है कि यह किसी का प्रैंक या ध्यान खींचने का तरीका हो सकता है। फिर भी, इस नोटिस ने कॉर्पोरेट कंपनियों में कर्मचारियों के अधिकारों और काम के अमानवीय माहौल पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है।