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क्या नौकरी के लिए इतनी जल्दी शेड्यूल बदलना उचित है? Gen-Z छात्र की कहानी

एक ग्रेजुएट छात्र मंथन ने फाइनल इंटरव्यू का समय बदलने की गुजारिश की, जिसके चलते उसे नौकरी की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। इस घटना ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है कि क्या नौकरी पाने के लिए इतनी जल्दी शेड्यूल बदलना उचित है। कई यूजर्स ने कंपनी के रवैये की आलोचना की है, जबकि कुछ ने इसे मंथन के लिए फायदेमंद बताया। जानें इस मामले में लोगों की राय और कंपनी की अपेक्षाएं।
 

नई दिल्ली में नौकरी के इंटरव्यू का विवाद


नई दिल्ली: नौकरी के इंटरव्यू से जुड़ा एक मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक ग्रेजुएट छात्र, मंथन, ने बताया कि जब उसने फाइनल इंटरव्यू का समय बदलने की मांग की, तो कंपनी ने उसे नौकरी की प्रक्रिया से बाहर कर दिया। छात्र ने इस बातचीत के स्क्रीनशॉट भी साझा किए हैं, जो उसने कंपनी के फाउंडर के साथ की थी।


30 मिनट की समय परिवर्तन की मांग

मंथन के अनुसार, कंपनी के फाउंडर ने उसे दोपहर 1:30 बजे संपर्क किया और उसी दिन 2 बजे फाइनल इंटरव्यू के लिए बुलाया। इतनी कम समय में उपस्थित होना उसके लिए संभव नहीं था।


इसलिए, मंथन ने इंटरव्यू को आधे घंटे आगे बढ़ाने का अनुरोध किया, लेकिन कंपनी ने उसकी इस मांग को नजरअंदाज करते हुए उसकी हायरिंग प्रक्रिया को समाप्त कर दिया।


कंपनी की अपेक्षाएं

मंथन द्वारा साझा किए गए चैट में कंपनी ने कहा कि वे तेजी से बढ़ रहे हैं और उन्हें ऐसे कर्मचारी चाहिए जो नौकरी को प्राथमिकता दें।


Got rejected by a company for asking to reschedule the final interview.
The founder messaged me at 1:30 PM asking me to join at 2 PM. I wasn’t available, so I asked if we could reschedule and bcoz of that they rejected me. lol pic.twitter.com/SKSTvzqUg7

— Manthan (@Manthan3_tw) September 6, 2026



सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

मंथन की पोस्ट के बाद, कई यूजर्स ने कंपनी के व्यवहार पर सवाल उठाए। कुछ ने कहा कि फाइनल इंटरव्यू के लिए एक घंटे से भी कम समय में बुलाना अव्यावहारिक है।


कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस घटना से मंथन को कंपनी के कार्य संस्कृति का पता चल गया। उनके अनुसार, ऐसी जगह नौकरी न मिलना शायद उसके लिए फायदेमंद हो सकता है।


वहीं, कुछ ने स्टार्टअप फाउंडर्स की उस सोच की आलोचना की, जिसमें कर्मचारियों से हर समय उपलब्ध रहने की उम्मीद की जाती है। यह मामला एक बार फिर Gen-Z और कंपनियों के कार्य संस्कृति, कार्य-जीवन संतुलन और कर्मचारियों की उपलब्धता पर बहस को जन्म देता है।