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क्या है मालेगांव का अनोखा स्कूटी कूलिंग जुगाड़? जानें इसकी खासियत

महाराष्ट्र के मालेगांव में एक युवक ने गर्मी से राहत पाने के लिए अपनी स्कूटी को 'चलती-फिरती एसी' में बदल दिया है। इस अनोखे कूलिंग जुगाड़ को मात्र 1500 रुपये में तैयार किया गया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानें इस तकनीक के पीछे का विज्ञान और क्या यह पूरी तरह सुरक्षित है।
 

भीषण गर्मी से राहत का अनोखा तरीका


नई दिल्ली: इस समय उत्तर और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इसी बीच, महाराष्ट्र के मालेगांव से एक अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


इंजीनियर भी रह गए दंग

इंजीनियर भी रह गए दंग


एक स्थानीय युवक ने गर्मी से बचने के लिए अपनी स्कूटी को 'चलती-फिरती एसी' में बदल दिया है। इस अनोखे 'देसी फ्रिज' का निर्माण मात्र 1500 रुपये में किया गया है, और इसे देखकर कई इंजीनियर भी हैरान रह गए हैं।


कैसे काम करता है यह कूलिंग हैक?


कैसे काम करता है यह 1500 रुपये का कूलिंग हैक?


इस वायरल वीडियो में युवक ने 'इवेपोरेटिव कूलिंग' के सिद्धांत का उपयोग किया है। स्कूटी के आगे एक पानी की बोतल, एक छोटा पंप, पाइप और फुहार फेंकने वाला नोजल लगाया गया है। जैसे ही स्कूटी चालू होती है, 12 वोल्ट की बैटरी से चलने वाला पंप सक्रिय हो जाता है और नोजल के माध्यम से पानी की बूँदें हवा में छोड़ता है।


क्या यह जुगाड़ सुरक्षित है?

असली हुनर डिग्री से नहीं मिलती


स्कूटी की तेज गति से आने वाली गर्म हवा पानी की बूँदों के संपर्क में आकर ठंडी हो जाती है, ठीक उसी तरह जैसे कूलर ठंडी हवा देते हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस कारीगरी की तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि असली प्रतिभा डिग्री में नहीं, बल्कि ऐसे देसी दिमाग में होती है।


क्या यह अनोखा जुगाड़ पूरी तरह सुरक्षित है?


हालांकि यह सेटअप गर्मी में राहत दे रहा है, लेकिन ऑटो विशेषज्ञों और कुछ सजग सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। सबसे बड़ा खतरा स्कूटी की वायरिंग और बैटरी लोड से है। यदि पंप और बैटरी का कनेक्शन सही न हो, तो स्कूटी में शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ठप होने का खतरा हो सकता है। इसके अलावा, तेज गति में पानी की फुहारें राइडर की आँखों में जा सकती हैं, जिससे संतुलन बिगड़ सकता है।