गूगल मैप पर भरोसा करना पड़ा भारी: हापुड़ में कार नाले में फंसी
हापुड़ में एक परिवार की मुश्किल यात्रा
हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में एक परिवार के लिए गूगल मैप पर निर्भर रहना एक गंभीर समस्या बन गया। शादी समारोह में शामिल होने के लिए जा रहे इस परिवार का वाहन गलत दिशा में चला गया और उनकी कार एक पानी से भरे नाले में फंस गई। हालांकि, राहत और बचाव दल ने समय पर पहुंचकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
गूगल मैप की मदद से यात्रा
जानकारी के अनुसार, दादरी से मेरठ के किठौर जा रहा एक परिवार गूगल मैप का उपयोग कर रहा था। जब वे हापुड़ के शामनगर क्षेत्र में पहुंचे, तो सड़क पर पानी जमा था। परिवार ने सोचा कि उनकी कार आसानी से निकल जाएगी, लेकिन कुछ ही दूरी पर कार नाले में गिर गई और फंस गई। कार में चार सदस्य और कुछ बच्चे भी थे, जो अचानक आई इस स्थिति के कारण बाहर नहीं निकल सके।
Google Map के भरोसे चल रही कार एक नाले में गिर गई। दरवाजे लॉक हो गए। 1 घंटे से ज्यादा वक्त तक 4 लोग फंसे रहे। पुलिस आई, जैसे–तैसे दरवाजा खोला गया। तब सारे लोग सुरक्षित निकल पाए।
— Kedar Nath Dubey (@DubeyKedar) June 15, 2026
📍 हापुड़, उत्तर प्रदेश pic.twitter.com/jOFkTXjcXb
बचाव कार्य और परिवार की स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई। बचावकर्मियों ने लगभग दो घंटे तक प्रयास करके कार में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी को चोट नहीं आई और कोई जनहानि भी नहीं हुई।
साहिल का बयान
कार चला रहे साहिल ने बताया कि उनका परिवार दादरी से किठौर में एक शादी में शामिल होने जा रहा था। रास्ते के लिए उन्होंने गूगल मैप का सहारा लिया था। जब वे पानी से भरे हिस्से में पहुंचे, तो उन्हें लगा कि कार आसानी से निकल जाएगी, लेकिन वाहन बीच रास्ते में फंस गया। इसके बाद उन्होंने मदद के लिए फोन किया, जिसके बाद रेस्क्यू टीम वहां पहुंची।
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि परिवार गूगल मैप द्वारा बताए गए ऐसे रास्ते पर पहुंच गया था, जो सुरक्षित नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल वाहन को भी नाले से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
रेस्क्यू अधिकारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिलने के तुरंत बाद टीम मौके पर पहुंची और सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई होने के कारण किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय यात्रियों को स्थानीय परिस्थितियों और रास्तों की वास्तविक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए।