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बिना पैरों के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई: रुस्तम नाबिएव की प्रेरणादायक कहानी

रुस्तम नाबिएव, एक साहसी पर्वतारोही, ने बिना पैरों के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर एक नया इतिहास रचा है। उनकी कहानी एक प्रेरणा है, जो यह दर्शाती है कि कठिनाइयों के बावजूद, अगर इरादे मजबूत हों, तो कुछ भी संभव है। 2015 में एक भयानक हादसे के बाद, उन्होंने अपने हाथों की ताकत से पर्वतारोहण की दुनिया में कदम रखा। जानें कैसे उन्होंने अपने सपनों को साकार किया और दुनिया को प्रेरित किया।
 

एक अद्भुत साहसिकता


नई दिल्ली: जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जो लोगों को तोड़ देती हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों में भी हार नहीं मानते और अपनी किस्मत खुद बनाते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसे ही साहसी व्यक्ति की कहानी वायरल हो रही है, जिसने साबित किया है कि मजबूत इरादों के साथ, बिना पैरों के भी दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ाई की जा सकती है।


बिना पैरों के किया गया ऐतिहासिक कार्य

हम बात कर रहे हैं रूस के प्रसिद्ध पर्वतारोही रुस्तम नाबिएव की। उन्होंने बिना पैरों के, केवल अपने हाथों की मदद से माउंट एवरेस्ट को फतह कर एक नया इतिहास रचा है।


दर्दनाक हादसे ने बदल दी जिंदगी

रुस्तम की यह उपलब्धि जितनी प्रेरणादायक है, उसके पीछे का संघर्ष उतना ही कठिन है। 2015 में एक भयानक दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए। एक रात जब वह एक इमारत में सो रहे थे, वह अचानक गिर गई। इस हादसे ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया, लेकिन उन्होंने निराशा में डूबने के बजाय लड़ाई जारी रखी।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @rs_sputnik नामक अकाउंट से उनका प्रेरणादायक वीडियो साझा किया गया है, जिसे लाखों लोगों ने देखा है। इस वीडियो में रुस्तम के जज़्बे को देखकर लोग उनकी सराहना कर रहे हैं। एवरेस्ट पर चढ़ाई के बाद उन्होंने एक प्रेरणादायक संदेश दिया, जिसमें कहा कि जब तक जीवन है, तब तक संघर्ष करते रहो। उनका सफर यह सिखाता है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, अगर ध्यान लक्ष्य पर हो, तो सफलता अवश्य मिलती है।




नए लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए

दुर्घटना के बाद, रुस्तम ने पर्वतारोहण को अपना नया लक्ष्य बनाया। उन्होंने पहले छोटी चोटियों पर चढ़ाई की और अपने हाथों को इस खेल के लिए तैयार किया। जब उनका आत्मविश्वास बढ़ा, तो उन्होंने माउंट एल्ब्रस और माउंट मानस्लू पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की।


एवरेस्ट अभियान की शुरुआत

इन सफलताओं के बाद, रुस्तम ने अपने सबसे बड़े सपने माउंट एवरेस्ट की ओर कदम बढ़ाया। मई 2026 में, अपने 34वें जन्मदिन पर, उन्होंने एवरेस्ट अभियान की शुरुआत की। शून्य से कई डिग्री नीचे के तापमान और जानलेवा बर्फीली हवाओं के बीच, उन्होंने केवल अपने हाथों की ताकत से बर्फ को चीरते हुए चोटी पर पहुंचकर सबको चौंका दिया।