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बैंक मैनेजर का विवादास्पद फैसला: कर्मचारियों को ताले में बंद कर काम करने पर मजबूर किया!

एक हालिया वायरल वीडियो में एक बैंक मैनेजर ने कर्मचारियों को काम खत्म करने के लिए ताले में बंद कर दिया। यह घटना कार्यस्थल की नैतिकता और कर्मचारियों के अधिकारों पर गंभीर सवाल उठाती है। वीडियो में कर्मचारी अपनी ड्यूटी खत्म होने की बात कह रहे हैं, लेकिन मैनेजर ने उन्हें बाहर नहीं जाने दिया। इस मामले ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है, जहां लोग इसे बंधुआ मजदूरी और श्रम कानूनों का उल्लंघन मान रहे हैं। जानें इस चौंकाने वाली घटना के बारे में और क्या प्रतिक्रिया आई है।
 

नई दिल्ली में बैंकिंग सेक्टर का चौंकाने वाला मामला


नई दिल्ली: जब कर्मचारी दिनभर की मेहनत के बाद घर लौटने की तैयारी कर रहे हों और अचानक दफ्तर के मुख्य द्वार पर ताला लटक जाए, तो किसी का भी गुस्सा भड़कना स्वाभाविक है। कॉर्पोरेट और बैंकिंग क्षेत्र में काम के दबाव की कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने कार्यस्थल की नैतिकता और कर्मचारियों के उत्पीड़न की सारी सीमाएं तोड़ दी हैं।


काम के समय के बाद ताला लगाना


इस वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि यह घटना एक बैंक शाखा की है। जब शाम को बैंक का कार्यकाल समाप्त हुआ और कर्मचारी घर जाने लगे, तब कथित तौर पर बैंक के मैनेजर ने उन्हें रोक दिया।


मुख्य द्वार पर ताला


जब स्टाफ ने समय समाप्त होने की बात कही और घर जाने का अनुरोध किया, तो मैनेजर ने उनकी एक न सुनी और मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। वीडियो में एक कर्मचारी स्पष्ट रूप से यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि उसकी ड्यूटी का समय खत्म हो चुका है, लेकिन मैनेजर का आदेश था कि जब तक सभी पेंडिंग काम पूरे नहीं होते, कोई भी बाहर नहीं जा सकता।


Bank manager locks branch gate, forcing staff to work late into the night💀😭 pic.twitter.com/J4VeHM0bat

— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) July 19, 2026



नौकरी के नाम पर उत्पीड़न


इस वायरल वीडियो की सटीक लोकेशन और संबंधित बैंक शाखा की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। जैसे ही यह क्लिप सामने आई, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर टॉक्सिक वर्क कल्चर पर तीखी बहस शुरू हो गई। नेटिज़न्स और पेशेवर इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। एक यूजर ने टिप्पणी की कि यह कोई नौकरी नहीं, बल्कि बंधुआ मजदूरी और खुला उत्पीड़न है। कई अन्य लोगों ने श्रम कानूनों के उल्लंघन का हवाला देते हुए आरोपी मैनेजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि कैसे कॉर्पोरेट लक्ष्यों की अंधी दौड़ में कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और मूल अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।