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ब्रिटेन की वेट्रोज ने सैनिटरी उत्पादों के सेक्शन का नाम बदला, क्या है इसके पीछे की कहानी?

ब्रिटेन की सुपरमार्केट चेन वेट्रोज ने अपने सैनिटरी उत्पादों के सेक्शन का नाम बदलकर 'इंटीमेट हाइजीन' रखा है, जिससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोग इसे महिलाओं की पहचान को कमजोर करने वाला कदम मानते हैं, जबकि कंपनी का कहना है कि यह निर्णय उत्पादों की विविधता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाएँ।
 

नई बहस का आगाज़


नई दिल्ली: ब्रिटेन की प्रमुख सुपरमार्केट श्रृंखला वेट्रोज के हालिया निर्णय ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में हलचल मचा दी है। कंपनी ने अपने स्टोर्स में सैनिटरी पैड, टैम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप जैसे उत्पादों के सेक्शन का नाम 'फेमिनिन केयर' से बदलकर 'इंटीमेट हाइजीन' कर दिया है। इस बदलाव के बाद कई लोगों ने इसे महिलाओं की पहचान से जुड़े शब्दों को हटाने का प्रयास बताया, जबकि कंपनी का कहना है कि यह निर्णय उत्पादों की विविधता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।


विवाद की शुरुआत

ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंपनी के अंदर की एक बातचीत सार्वजनिक हो गई। बताया गया कि प्राइड मंथ से पहले एक कर्मचारी ने प्रबंधन से कहा कि इस सेक्शन में केवल महिलाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले उत्पाद नहीं होते। कर्मचारी का तर्क था कि कुछ ट्रांस पुरुष (जिन्हें जन्म के समय महिला के रूप में दर्ज किया गया था) भी मासिक धर्म का अनुभव कर सकते हैं, इसलिए सेक्शन का नाम अधिक समावेशी होना चाहिए।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ

रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने स्टोर्स और कंप्यूटर सिस्टम में सेक्शन का नाम बदलने का निर्णय लिया। हालांकि, जैसे ही यह निर्णय सामने आया, सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कई महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और कुछ राजनीतिक नेताओं ने इसे महिलाओं की पहचान को कमजोर करने वाला कदम बताया। उनका कहना है कि समावेशिता के नाम पर महिलाओं से जुड़े पारंपरिक शब्दों को हटाना उचित नहीं है।


विवाद बढ़ने पर वेट्रोज ने अपनी सफाई में कहा कि इस सेक्शन में अब केवल मासिक धर्म से जुड़े उत्पाद ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए यूरिन लीक (इनकॉन्टिनेंस) से संबंधित उत्पाद भी उपलब्ध हैं। ऐसे में सेक्शन का नया नाम सभी प्रकार के उत्पादों को बेहतर ढंग से दर्शाता है।


वोक कल्चर पर बहस

ब्रिटिश मीडिया के अनुसार, कंपनी इससे पहले भी जेंडर-न्यूट्रल भाषा के इस्तेमाल को लेकर चर्चा में रह चुकी है। इस घटना ने एक बार फिर वोक कल्चर और समावेशी भाषा के उपयोग पर वैश्विक बहस को हवा दे दी है। समर्थकों का मानना है कि ऐसी भाषा सभी लोगों को शामिल करने का प्रयास है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे महिलाओं की विशिष्ट पहचान से जुड़े शब्द धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन से गायब हो रहे हैं।