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ब्रिटेन के खतरनाक कैदी रॉबर्ट मौड्सली की अनोखी प्रेम कहानी

ब्रिटेन के खतरनाक कैदी रॉबर्ट मौड्सली, जो पिछले 52 वर्षों से जेल में है, अब 71 वर्षीय महिला के प्यार में है। उसकी कहानी न केवल अपराध और सजा के पहलुओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक व्यक्ति की मानसिकता और समाज की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी होती है। जानें मौड्सली के अपराधों और उसके अनोखे रिश्ते के बारे में।
 

एक अनोखी कहानी: रॉबर्ट मौड्सली


नई दिल्ली: कुछ अपराधी मामलों की कहानियाँ समाज को हिला देती हैं। ब्रिटेन की एक अत्यधिक सुरक्षित जेल में रॉबर्ट मौड्सली नामक कैदी पिछले 52 वर्षों से कैद है। 20 वर्ष की आयु में पहली हत्या करने वाला मौड्सली ब्रिटेन का सबसे लंबे समय तक जेल में रहने वाला कैदी माना जाता है। उसने जेल में रहते हुए तीन अन्य कैदियों की भी हत्या की। अब 70 वर्ष की आयु में, उसकी जिंदगी में 71 वर्षीय महिला का प्रवेश हुआ है, जिससे उसे प्यार हो गया है। यह रिश्ता केवल फोन कॉल और पत्रों तक सीमित है।


रॉबर्ट मौड्सली का आपराधिक सफर

मौड्सली का आपराधिक जीवन लंदन में जॉन फैरेल की हत्या से शुरू हुआ। अदालत में उसने कहा कि फैरेल ने उसे बच्चों के यौन शोषण की तस्वीरें दिखाई थीं। अदालत ने उसे मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और उसे ब्रॉडमूर मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में भेजा। लेकिन वहाँ भी उसका खूनी सिलसिला जारी रहा।


जेल में हत्याएं: मौड्सली का खतरनाक इतिहास

ब्रॉडमूर में रहते हुए, मौड्सली ने एक अन्य कैदी के साथ मिलकर फ्रांसिस नामक एक व्यक्ति की हत्या की, जो बच्चों के यौन शोषण का आरोपी था। इसके बाद उसे वेकफील्ड जेल में स्थानांतरित किया गया, जहाँ उसने 1978 में दो और कैदियों, सैल्नी डारवुड और विलियम रॉबर्ट्स को मार डाला। रिपोर्टों के अनुसार, उसके सभी शिकार यौन अपराधों में लिप्त थे।


यौन अपराधियों के प्रति मौड्सली की नफरत

मौड्सली की मानसिकता का एक जटिल पहलू यह है कि वह केवल यौन अपराधियों को निशाना बनाता है। उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उसे कभी जेल से रिहा किया गया और किसी यौन शोषक का सामना हुआ, तो वह उसे मारने से नहीं चूकेगा। मौड्सली मानता है कि उसकी सुरक्षा और समाज की भलाई के लिए उसका जेल में रहना ही बेहतर है। आज भी, वह उस महिला से एक बार मिलना चाहता है, जो उसकी जिंदगी का सहारा बनी है। यह कहानी कानून और मनोविज्ञान के लिए एक चुनौती बनी हुई है।