लखनऊ में डॉक्टरों ने 13 सेंटीमीटर लंबी चाकू की ब्लेड से युवक की जान बचाई
लखनऊ में अद्भुत चिकित्सा सफलता
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 34 वर्षीय एक युवक की जान चिकित्सकों की कुशलता और त्वरित उपचार के कारण सुरक्षित रही। युवक के सीने में लगभग 13 सेंटीमीटर लंबी चाकू की ब्लेड गहराई तक धंसी हुई थी, जो फेफड़ों के पास एक बड़ी रक्त वाहिका के बेहद निकट पहुंच चुकी थी। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जरी के माध्यम से ब्लेड को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। वर्तमान में मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।
हमले के दौरान चाकू की ब्लेड धंसी
जानकारी के अनुसार, लखीमपुर खीरी के निवासी सर्वेश पर 4 जुलाई की रात एक धारदार हथियार से हमला किया गया। इस हमले में चाकू की ब्लेड उनके सीने के दाहिने हिस्से में गहराई तक धंस गई। पहले उन्हें स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अगले दिन लखनऊ के KGMU ट्रॉमा सेंटर भेजा गया।
गंभीर स्थिति का पता चला
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने देखा कि सर्वेश के शरीर में काफी अंदरूनी रक्तस्राव हो चुका था और उनका रक्तचाप भी बहुत कम था। सीटी स्कैन से पता चला कि ब्लेड फेफड़ों के उस हिस्से तक पहुंच गई थी, जहां प्रमुख रक्त वाहिकाएं और श्वास नलियां होती हैं। यह स्थिति अत्यंत जोखिम भरी थी क्योंकि ब्लेड एक बड़ी रक्त वाहिका के बेहद करीब थी।
सुरक्षित रणनीति के तहत ऑपरेशन
डॉक्टरों ने तुरंत ब्लेड निकालने की बजाय एक विशेष योजना बनाई। विशेषज्ञों का मानना था कि यदि बिना तैयारी के ब्लेड निकाली जाती, तो तेज अंदरूनी रक्तस्राव से मरीज की जान जा सकती थी। इसलिए ऑपरेशन थिएटर में पहले आसपास की रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित किया गया और फिर सावधानी से ब्लेड को बाहर निकाला गया।
विशेषज्ञों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन
यह जटिल सर्जरी ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम द्वारा की गई। ऑपरेशन के दौरान मरीज के सीने से लगभग 500 मिलीलीटर जमा खून और थक्के निकाले गए। इसके बाद क्षतिग्रस्त रक्त वाहिका की मरम्मत की गई और फेफड़े को सुरक्षित बचा लिया गया।
ICU में चल रहा उपचार
सफल ऑपरेशन के बाद सर्वेश को आईसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति पहले से काफी बेहतर है और उपचार का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। समय पर सही निर्णय और विशेषज्ञों की टीमवर्क के कारण यह जटिल ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की जान बचाई जा सकी।