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लीसा की अद्भुत यात्रा: 23 साल बाद अपने असली परिवार से मिलीं

लीसा की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जिसमें उन्होंने 23 साल बाद अपने असली माता-पिता को खोज निकाला। स्वीडन में पली-बढ़ी लीसा ने चीन लौटकर अपने परिवार से पुनर्मिलन किया। इस भावनात्मक क्षण में उनकी मां ने उन्हें पारंपरिक कपड़े पहनाए और जेड का उपहार दिया। जानें कैसे DNA परीक्षण ने इस पुनर्मिलन में मदद की और लीसा के जीवन का यह महत्वपूर्ण सपना कैसे पूरा हुआ।
 

एक भावनात्मक पुनर्मिलन


नई दिल्ली: कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो यह दर्शाती हैं कि समय चाहे कितना भी बीत जाए, अपने प्रियजनों से मिलने की उम्मीद कभी समाप्त नहीं होती। स्वीडन में पली-बढ़ी 23 वर्षीय लीसा की कहानी भी इसी तरह की है। जन्म के तुरंत बाद अपने परिवार से बिछड़ने वाली लीसा ने लगभग 23 साल बाद चीन लौटकर अपने असली माता-पिता को खोज निकाला। जब वह पहली बार अपनी जन्म देने वाली मां से मिलीं, तो यह क्षण वहां उपस्थित सभी के लिए अत्यंत भावुक था।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लीसा का जन्म 2003 में चीन के अनहुई प्रांत में हुआ था। उस समय उनका नाम गाओ जियानक्वान था। आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे उनके माता-पिता ने जन्म के कुछ समय बाद उन्हें एक दाई के पास छोड़ दिया। लेकिन कुछ दिनों बाद बच्ची को एक खेल स्टेडियम के पास छोड़ दिया गया, जहां से स्थानीय अधिकारियों ने उसे सुरक्षित बरामद किया।


जांच के दौरान यह पता चला कि बच्ची को कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं। इसके बाद उसे एक बाल कल्याण केंद्र में भेजा गया, जहां उसका पालन-पोषण शुरू हुआ। लगभग एक वर्ष की उम्र में, स्वीडन के एक दंपति ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे गोद लिया और वह उनके साथ स्वीडन चली गई।


DNA परीक्षण से मिली पहचान

लीसा बचपन से ही अपने असली परिवार और जन्म से जुड़े सवालों के जवाब खोजने की कोशिश कर रही थीं। उनके स्वीडिश माता-पिता ने भी इस इच्छा का पूरा समर्थन किया। मार्च 2026 में, लीसा ने चीन की संस्था 'बेबी कम होम' से संपर्क किया, जो बिछड़े परिवारों को पुनर्मिलन में मदद करती है। संस्था ने DNA परीक्षण के माध्यम से लीसा के जैविक परिवार की पहचान की। इसके बाद उनके वर्षों के इंतजार का अंत हुआ और परिवार से मिलने की तैयारी शुरू हुई।


लीसा अपने स्वीडिश माता-पिता के साथ चीन के अनहुई प्रांत पहुंचीं, जहां उनका परिवार बेसब्री से उनका इंतजार कर रहा था। स्वागत के लिए एक विशेष बैनर लगाया गया था, जिस पर लिखा था कि दुनिया का सबसे सुंदर रास्ता अपने घर लौटने का रास्ता होता है। अपनी मां को सामने देखते ही लीसा खुद को रोक नहीं सकीं और उन्हें गले लगाकर भावुक हो गईं। उनकी मां ने उन्हें पारंपरिक लाल किपाओ पहनाया और जेड से बना उपहार भी भेंट किया। लीसा ने कहा कि अपने अतीत और अपनी जड़ों को जानना उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सपना था।