2026 में सूर्य ग्रहण: जानें कब और कैसे होगा अद्भुत खगोलीय दृश्य
सूर्य ग्रहण 2026: एक विशेष खगोलीय घटना
सूर्य ग्रहण 2026: वर्ष 2026 खगोलीय घटनाओं के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा। एक ओर होली के त्योहार की तिथि को लेकर कुछ भ्रम है, वहीं दूसरी ओर सूर्य और चंद्र ग्रहण के बारे में लोगों की जिज्ञासा बढ़ रही है। पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार ग्रहण के कारण पारंपरिक तिथियों में बदलाव देखने को मिलेगा।
2026 में चंद्र ग्रहण होली के ठीक अगले दिन होगा, जबकि सूर्य ग्रहण के बारे में भी कई चर्चाएं हो रही हैं। विशेषज्ञों ने बताया है कि 'सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण' 2027 में होगा, जो 6 मिनट 22 सेकंड तक चलेगा।
होली की तिथि पर असमंजस क्यों?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 2 मार्च 2026 को होलिका दहन होगा। आमतौर पर इसके अगले दिन रंगों की होली मनाई जाती है, लेकिन इस बार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होगा।
ग्रहण के दौरान सूतक काल में पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसलिए ज्योतिषियों की सलाह है कि 3 मार्च को रंग खेलने से बचना चाहिए। इस कारण रंगों की होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
2026 में सूर्य ग्रहण: कब और कहां होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में दो सूर्य ग्रहण होंगे। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को हो चुका है, जबकि दूसरा 12 अगस्त 2026 को होगा।
हालांकि, 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से यूरोप, कनाडा और ग्रीनलैंड में देखा जा सकेगा। चूंकि यह भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और धार्मिक गतिविधियों पर कोई रोक नहीं रहेगी।
2027 में होगा सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण
सोशल मीडिया पर 2026 के सूर्य ग्रहण के बारे में चल रही अफवाहों के बीच विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि 'सदी का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण' 2 अगस्त 2027 को होगा। यह 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण होगा, जिसकी अवधि लगभग 6 मिनट 22 सेकंड रहेगी।
इतनी लंबी अवधि का सूर्य ग्रहण इसके बाद 2114 तक नहीं देखा जाएगा। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में घना अंधेरा छा जाएगा, जिससे दिन में रात जैसा दृश्य नजर आ सकता है।
भारत में 2027 का सूर्य ग्रहण कहां दिखाई देगा?
2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत के कई राज्यों में आंशिक रूप से दिखाई देगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में इसे देखा जा सकेगा।
चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य होगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य रहेगा।
ग्रहण क्या है?
खगोल विज्ञान के अनुसार, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है, तब सूर्य ग्रहण होता है। यह प्रक्रिया अमावस्या के दिन संभव होती है।
हिंदू मान्यताओं में ग्रहण को राहु और केतु से जोड़ा जाता है, जिन्हें पौराणिक कथाओं में सूर्य और चंद्रमा को ग्रसित करने वाला बताया गया है।