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2026 में होली: प्रेम और रंगों का त्योहार

2026 में होली का त्योहार प्रेम और रंगों का प्रतीक है, जो पुरानी यादों को भुलाने और नए रिश्तों की शुरुआत का अवसर प्रदान करता है। इस लेख में हम होली के पौराणिक महत्व, भगवान शिव और कामदेव की कहानियों, और राधा-कृष्ण की रंगीन लीला के बारे में जानेंगे। होली का यह पर्व हमें एकजुट होने और खुशियों को बांटने का संदेश देता है। जानें कैसे यह त्योहार आज भी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है।
 

होली का महत्व और पौराणिक कथाएँ

नई दिल्ली: भोलेनाथ की दया और उदारता अद्वितीय है, लेकिन जब उनका क्रोध भड़कता है, तो कोई भी उनके सामने टिक नहीं सकता। होली का त्योहार हर साल लोगों के दिलों में उमंग भर देता है। यह केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि पुरानी यादों को भुलाने और नए रिश्तों की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व अच्छाई की बुराई पर विजय का उत्सव है।

2026 में होली 4 मार्च को धूमधाम से मनाई जाएगी, जबकि एक दिन पहले 3 मार्च को होलिका दहन होगा। इस त्योहार की जड़ें गहरी पौराणिक कथाओं में हैं, विशेषकर भगवान शिव, कामदेव और राधा-कृष्ण की कहानियों में, जो आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।


कामदेव का प्रयास और शिव का क्रोध

कामदेव का प्रयास

माता पार्वती भगवान शिव से विवाह की इच्छा रखती थीं, लेकिन शिव जी तपस्या में लीन थे। उनका मन सांसारिक मोह से दूर था। तब प्रेम के देवता कामदेव ने पार्वती की सहायता के लिए कदम बढ़ाया। उन्होंने शिव पर पुष्प बाण चलाया, जिससे उनकी तपस्या भंग हो गई। यह बाण प्रेम की लहर पैदा करने वाला था, लेकिन शिव का ध्यान टूटते ही उनका क्रोध भड़क उठा।


क्रोध की अग्नि और कामदेव का अंत

क्रोध की अग्नि और कामदेव का भस्म होना

भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोली और उनके क्रोध की अग्नि में कामदेव क्षण भर में भस्म हो गए। यह घटना देवलोक के लिए दुखदायी साबित हुई। कामदेव की अनुपस्थिति से प्रेम और सृजन की शक्ति प्रभावित होने लगी। देवताओं ने देखा कि यह कार्य अच्छे इरादे से किया गया था, फिर भी शिव का क्रोध शांत नहीं हुआ। यह घटना तपस्या की शक्ति को दर्शाती है।


प्रार्थना और शिव का वरदान

प्रार्थना और शिव का वरदान

कामदेव की पत्नी ने भगवान शिव के सामने विनती की। उन्होंने बताया कि कामदेव ने यह सब पार्वती की मदद के लिए किया था। शिव जी का मन पिघला और उन्होंने कामदेव को अगले जन्म में प्रद्युम्न के रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद दिया। इस खुशी में देवताओं ने रंग बिखेरकर उत्सव मनाया, जिसे होली की शुरुआत माना जाता है। यह कथा प्रेम की ताकत और क्षमा के महत्व को दर्शाती है।


राधा-कृष्ण की रंगीन लीला

राधा-कृष्ण की रंगों भरी लीला

होली का एक और रंगीन पहलू राधा और श्रीकृष्ण की कथा से जुड़ा है। बचपन में कृष्ण ने यशोदा मां से पूछा कि राधा इतनी गोरी कैसे हैं। मां ने मजाक में कहा कि रंग लगा दो। तब कृष्ण ने राधा और गोपियों पर रंग डालना शुरू किया। यह खेल प्रेम की मस्ती का प्रतीक बन गया। आज भी ब्रज में होली इसी उत्साह से मनाई जाती है, जहां रंग प्रेम की भाषा बोलते हैं।


होली का संदेश आज के समय में

होली का संदेश आज के दौर में

होली हमें सिखाती है कि पुरानी कटुता को भुलाकर रिश्तों को रंगों से सजाना चाहिए। चाहे शिव-कामदेव की कथा हो या कृष्ण की लीला, हर कहानी प्रेम, क्षमा और उल्लास की बात करती है। 2026 की होली भी हमें एकजुट होने और खुशियां बांटने का अवसर देगी। आइए इस बार रंगों के साथ-साथ दिलों को भी मिलाएं।