आरती का महत्व और सही विधि: दीपक को हाथ में या थाली में?
आरती का महत्व
हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में आरती का एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह पूजा का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसमें भक्त दीपक जलाकर भगवान की स्तुति करते हैं और अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। दीपक की लौ को अग्नि तत्व और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में आरती करने के कुछ नियम बताए गए हैं, जिनमें से एक यह है कि दीपक को हाथ में या थाली में रखा जाना चाहिए।
दीपक को हाथ में या थाली में रखना
आरती का मुख्य उद्देश्य दीपक को घुमाते हुए भगवान के विभिन्न अंगों की वंदना करना है। जब आप भगवान की मूर्ति के सामने खड़े होकर आरती करते हैं, तो परंपरा के अनुसार दीपक को थाली में रखकर दोनों हाथों से थाली को घुमाया जाता है।
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सिर्फ दीपक को हाथ में पकड़ना कम प्रचलित है, क्योंकि आरती की थाली में दीपक के साथ फूल, कपूर और घंटी भी होती है। थाली को हाथ में पकड़कर आरती करने से दीपक की लौ भगवान के चरणों से लेकर मुखमंडल तक ले जाई जाती है।
यह प्रक्रिया देवी-देवता के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा भाव को दर्शाती है। आरती समाप्त होने के बाद दीपक को थाली पर रखा जाता है। इसे तुरंत जमीन पर नहीं रखना चाहिए।
दीपक को थाली में या किसी ऊंचे और साफ आसन पर रखना आवश्यक है। यह शुद्धता बनाए रखने के लिए जरूरी है, क्योंकि दीपक अग्नि देवता का प्रतीक है और इसकी लौ से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
आरती के बाद भक्त दीपक की लौ या थाली पर हाथ फेरकर अपने सिर और आंखों पर लगाते हैं, जिसे आरती लेना कहा जाता है। इस दौरान दीपक का थाली में सुरक्षित रहना आवश्यक है, ताकि सभी लोग आसानी से आरती ले सकें।