×

किन्नर समुदाय के अंतिम संस्कार की अनकही परंपराएं: जानें क्या है खास

इस लेख में हम किन्नर समुदाय के अंतिम संस्कार की अनकही परंपराओं और रीति-रिवाजों के बारे में जानेंगे। जानें कैसे किन्नर समुदाय अपने दिवंगत सदस्यों का अंतिम संस्कार करता है और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या हैं। यह जानकारी आपको किन्नर समुदाय की संस्कृति और परंपराओं को समझने में मदद करेगी।
 

नई दिल्ली में किन्नर समुदाय की पहचान


नई दिल्ली: भारतीय समाज में स्त्री और पुरुष के साथ-साथ किन्नर समुदाय की भी एक महत्वपूर्ण भूमिका है। समय के साथ, किन्नर समाज के प्रति लोगों की सोच में बदलाव आया है, लेकिन उनकी कई परंपराएं आज भी अनजानी हैं। इनमें से एक है किन्नर समुदाय के अंतिम संस्कार से जुड़ी मान्यताएं और रीति-रिवाज।


अंतिम संस्कार की प्रक्रिया

जब किन्नर समुदाय का कोई सदस्य निधन होता है, तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आम लोगों से भिन्न होती है। मान्यता है कि उनकी शव यात्रा को सार्वजनिक नहीं किया जाता और इसे गुप्त रखा जाता है। कई स्थानों पर यह परंपरा आज भी निभाई जाती है। कहा जाता है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रात में पूरी की जाती है, ताकि बाहरी लोगों की उपस्थिति कम हो।


दफनाने की प्रक्रिया

एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, किन्नरों के शव को जलाने के बजाय दफनाया जाता है। अंतिम संस्कार से पहले शव को सफेद कपड़े में लपेटा जाता है, और इस बात का ध्यान रखा जाता है कि शरीर पर कोई बंधन न हो। समुदाय का मानना है कि इससे आत्मा को शांति और मुक्ति मिलती है।


किन्नर समुदाय में मृत्यु को केवल शोक का विषय नहीं माना जाता, बल्कि इसे एक नई शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इसलिए, कई स्थानों पर विलाप करने के बजाय दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं की जाती हैं।


आराध्य देव की पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किन्नर समुदाय अपने आराध्य देव इरावन की पूजा करता है और दिवंगत आत्मा के लिए मंगलकामना करता है। यह भी माना जाता है कि आत्मा को अगले जन्म में किन्नर रूप न मिले और उसे बेहतर जीवन प्राप्त हो, इसके लिए प्रार्थना की जाती है। अंतिम संस्कार के बाद, समुदाय के लोग कुछ दिनों तक व्रत भी रखते हैं।