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कूर्म जयंती: भगवान विष्णु की पूजा का महत्व और विधि

कूर्म जयंती, भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा का पर्व है, जो हर साल वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन की पूजा विधि और महत्व जानकर भक्तों को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। जानें इस विशेष दिन की तिथि, मुहूर्त और पूजा की विधि के बारे में।
 

कूर्म जयंती का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा को सभी दुखों का निवारण और इच्छाओं की पूर्ति का साधन माना जाता है। आज, 01 मई को कूर्म जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन वैशाख मास की पूर्णिमा को भगवान विष्णु के कूर्म अवतार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए, इस अवसर पर कूर्म जयंती की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं।


तिथि और मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, हर वर्ष बैशाख माह की पूर्णिमा को कूर्म जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष, 30 अप्रैल की रात 09:12 बजे से पूर्णिमा तिथि का आरंभ हुआ, जो 01 मई 2026 की रात 10:52 बजे तक चलेगा। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, आज 01 मई को कूर्म जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त शाम 04:17 से 06:56 बजे तक रहेगा।


पूजा विधि

इस दिन, प्रातः जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें। इसके बाद, भगवान विष्णु को पीले चंदन, केसर, और हल्दी से तिलक करें। पीले रंग के फूल, वस्त्र, फल, और मिठाई अर्पित करें। भगवान विष्णु के कच्छप अवतार की कथा का पाठ करें। अंत में, पूजा में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।


कूर्म जयंती का महत्व

जो भी व्यक्ति इस दिन विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करता है, श्रीहरि उसकी सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं। कूर्म जयंती की पूजा का पुण्यफल जातक के पापों को नष्ट करता है और चिंताओं को दूर करता है। इस प्रकार, व्यक्ति को जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है।