×

केदारनाथ मंदिर: सर्दियों में बाबा केदार का दूसरा निवास

केदारनाथ मंदिर, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, सर्दियों में भक्तों को दर्शन नहीं देता। इस दौरान बाबा केदार की पूजा ऊखीमठ में होती है, जिसे उनका शीतकालीन निवास माना जाता है। जानें इस मंदिर की विशेषताओं, चमत्कारी दीपक और अन्य देवताओं के स्थान परिवर्तन के बारे में।
 

केदारनाथ मंदिर का महत्व

केदारनाथ मंदिर, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, उत्तराखंड के चार धामों में से भी एक माना जाता है। सर्दियों के दौरान, बाबा केदार भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन 6 महीनों में बाबा की पूजा कहां होती है और उनका दूसरा निवास स्थान क्या है? इस लेख में हम आपको बताएंगे कि सर्दियों में बाबा केदार की पूजा कैसे होती है और उनका शीतकालीन निवास कहां है।


बाबा केदार के द्वार बंद होने की प्रक्रिया

सर्दियों में बर्फबारी के कारण बाबा केदार के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। यहां इतनी अधिक बर्फ गिरती है कि मंदिर तक पहुंचना और आध्यात्मिक गतिविधियों का संचालन करना कठिन हो जाता है। पहाड़ी क्षेत्र में सर्दियों में ऑक्सीजन की कमी भी होती है। इसलिए बाबा केदार का दूसरा निवास ऊखीमठ है, जिसे बाबा का शीतकालीन घर कहा जाता है। केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद, बाबा केदार की चलविग्रह पंचमुखी डोली ऊखीमठ पहुंचती है।


ऊखीमठ का ओंकारेश्वर मंदिर

ऊखीमठ में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर को दूसरा केदारनाथ कहा जाता है। यहां सर्दियों में भी भक्त बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। आने वाले समय में बाबा ऊखीमठ से श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इस मंदिर की संरचना केदारनाथ मंदिर से काफी मिलती-जुलती है, लेकिन इसका प्रांगण बड़ा है और दीवारों पर सुंदर नक्काशी की गई है। 6 महीने बाद शुभ मुहूर्त में बाबा को फिर से केदारनाथ के लिए रवाना किया जाता है।


अन्य देवताओं का स्थान परिवर्तन

सर्दियों में केवल बाबा केदार ही नहीं, बल्कि गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ भी अपना स्थान बदलते हैं। गंगोत्री धाम को मुखवा, यमुनोत्री को खरसाली और बद्रीनाथ को पांडुकेश्वर और ज्योर्तिमठ में स्थापित किया जाता है। बर्फबारी के दौरान चारों धाम को उनके दूसरे निवास पर विराजमान किया जाता है।


चमत्कारी दीपक की कहानी

यह जानकर आश्चर्य होगा कि केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद 6 महीने तक पूजा-पाठ नहीं होता। फिर भी, मंदिर के अंदर एक चमत्कारी दीपक लगातार जलता रहता है। इस दीपक के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं होती, फिर भी यह अपने आप जलता रहता है। इस दीपक के जलने का रहस्य आज तक अनजान है।