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गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना के लिए सही तैयारी कैसे करें?

गणेश चतुर्थी के अवसर पर मूर्ति स्थापना के लिए सही तैयारी करना आवश्यक है। इस लेख में जानें कि स्थापना के मुहूर्त से पहले क्या करना चाहिए, कब दीपक जलाना सही है, और भोग और आरती का समय क्या होना चाहिए। साथ ही, मूर्ति को सजाने में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस पर्व को मनाने के लिए आवश्यक सभी जानकारी प्राप्त करें और अपने परिवार के साथ इस शुभ अवसर का आनंद लें।
 

गणेश चतुर्थी की तैयारी


नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी के अवसर पर बप्पा की मूर्ति घर लाने के बाद कई लोग यह नहीं समझ पाते कि स्थापना के मुहूर्त तक क्या करना चाहिए। यह जानना महत्वपूर्ण है कि चतुर्थी तिथि का आरंभ और गणपति की विधिवत स्थापना में अंतर होता है। तिथि लगने के बाद पर्व की शुरुआत मानी जाती है, लेकिन गणपति का आवाहन, संकल्प और मुख्य पूजा निश्चित मुहूर्त में करना शुभ होता है। पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में मध्याह्न स्थापना का मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। विभिन्न शहरों में समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।


सुबह की तैयारी

यदि गणपति की प्रतिमा पहले से घर में आ चुकी है, तो उसे साफ-सुथरी और सुरक्षित जगह पर रखें। मूर्ति को बार-बार उठाने या उसकी दिशा बदलने से बचें। जिन घरों में स्थापना तक प्रतिमा को स्वच्छ कपड़े से ढकने की परंपरा है, वहां मुहूर्त के समय ही कपड़ा हटाया जा सकता है। आगमन के समय परिवार के सदस्यों द्वारा चेहरा खोलकर स्वागत आरती करने की परंपरा हो तो उसे निभाना चाहिए।


सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और पूजा की सभी सामग्री के लिए पर्याप्त जगह रखें। कलश, अक्षत, रोली, मौली, जनेऊ, पान-सुपारी, फूल, दूर्वा, मोदक और नैवेद्य जैसी सामग्री पहले से तैयार कर लें, ताकि स्थापना के समय किसी चीज को खोजने की आवश्यकता न पड़े।


दीपक जलाने का सही समय

पूजा स्थल पर श्रद्धा के साथ दीपक जलाना उचित है, लेकिन इसे मुख्य स्थापना पूजा का हिस्सा मानकर पूरी विधि शुरू न करें। दीपक को मूर्ति, कपड़े और सजावट से सुरक्षित दूरी पर रखें। यदि प्रतिमा कपड़े से ढकी है, तो उसके पास दीपक या धूप रखने से बचें। स्थापना के मुहूर्त से पहले परिवार गणपति का स्मरण कर सकता है। इस दौरान "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप या गणेश स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। यह समय मुख्य पूजा के स्थान पर नहीं, बल्कि मन और पूजा की तैयारी के लिए होना चाहिए।


भोग और आरती का समय

मोदक और अन्य भोग पहले से बनाकर स्वच्छ जगह पर ढककर रखे जा सकते हैं, लेकिन इन्हें नैवेद्य के रूप में मुख्य स्थापना पूजा के दौरान अर्पित करना बेहतर होता है। फूल और दूर्वा भी पहले से तैयार रखें, लेकिन उनका मुख्य अर्पण संकल्प और आवाहन के बाद करें। स्थापना पूरी होने के बाद मुख्य आरती करना उचित रहता है। यदि परिवार में गणपति के घर आने पर स्वागत आरती करने की परंपरा है, तो वह अलग बात है। स्वागत आरती और स्थापना के बाद होने वाली मुख्य आरती को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।


स्थापना से पहले किन बातों का ध्यान रखें

मूर्ति को सजाने के लिए उस पर पानी, दूध या पंचामृत डालने से बचें, खासकर जब प्रतिमा मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी हो। इससे रंग खराब होने या मूर्ति में दरार आने का खतरा हो सकता है। अभिषेक की परंपरा हो तो अपने पुरोहित की सलाह के अनुसार ही करें। मूर्ति के आसपास जूते, पैकिंग का सामान या सजावट से जुड़ा कचरा न रखें। फोटो लेने के लिए प्रतिमा को बार-बार घुमाना भी उचित नहीं है।


इस प्रकार स्थापना से पहले का समय खाली इंतजार करने का नहीं, बल्कि पूजा की तैयारी का है। सुबह 7:06 से 11:02 बजे के बीच परिवार पूजा स्थल, सामग्री और स्वयं को तैयार कर सकता है। इसके बाद निर्धारित मुहूर्त में संकल्प, आवाहन और गणपति स्थापना की जाए। क्षेत्र और परिवार की परंपरा अलग हो तो अपने पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।