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गुरु पूर्णिमा: महत्व और पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्हें पहले गुरु माना जाता है। जानें कब मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा और इस दिन पूजा करने की विधि क्या है। साथ ही, दान का महत्व भी समझें, जो इस दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।
 

गुरु पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, सफलता और सकारात्मकता का संचार होता है। हर वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्हें पहले गुरु के रूप में माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों और पुराणों का ज्ञान समाज में फैलाया।


गुरु पूर्णिमा की तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 06:19 बजे से प्रारंभ हो रही है और यह 29 जुलाई की शाम 08:06 बजे तक रहेगी। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।


पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर अपने गुरुजनों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। यदि गुरु आपके पास नहीं हैं, तो उनके चित्र के माध्यम से श्रद्धा अर्पित करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और दिनभर नियम और संयम के साथ इसका पालन करें। शाम को विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।


दान का महत्व

गुरु पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, धन या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए। इससे आत्मिक संतोष की प्राप्ति होती है।