चैत्र नवरात्रि 2026: मां शैलपुत्री की आराधना का महत्व
चैत्र नवरात्रि का आगाज़
नई दिल्ली: आज सुबह से ही भक्तों में उत्साह का माहौल है। चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत हो चुकी है, जो 19 मार्च से लेकर राम नवमी तक चलेगी। इस पर्व के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। हिमालय की पुत्री मानी जाने वाली मां की आराधना से भक्तों को मानसिक शांति, स्थिरता और सकारात्मकता प्राप्त होती है। इसके साथ ही, आज कलश स्थापना का भी शुभ मुहूर्त है, जो घर में सकारात्मकता का संचार करता है।
मां शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप
मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत सुंदर और शक्तिशाली है। वे वृषभ पर विराजमान हैं, दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है क्योंकि वे हिमालय की पुत्री हैं। यह सती का दूसरा जन्म है, इसलिए इन्हें पार्वती और हेमवती के नाम से भी जाना जाता है। आज का विशेष रंग पीला है, जिसे भक्त पूजा के दौरान पहनते हैं।
पौराणिक कथा का महत्व
प्रजापति दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित न करने के कारण मां सती ने अपमान सहन नहीं किया और योगाग्नि में अपने शरीर का त्याग कर दिया। दुखी शिव ने यज्ञ को नष्ट कर दिया। इसके बाद मां हिमालय में पुत्री के रूप में जन्मीं, जिन्हें शैलपुत्री कहा गया। शिव से विवाह कर वे उनकी अर्धांगिनी बनीं। यह कथा दर्शाती है कि सच्ची भक्ति और प्रेम कितनी गहरी होती है।
पूजा की विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। मंदिर में चौकी सजाकर मां की तस्वीर स्थापित करें। रोली, चावल, सफेद या पीले फूल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। मुख्य मंत्र 'ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः' का 108 बार जाप करें। ध्यान मंत्र 'वन्दे वाञ्छित लाभाय...' का पाठ करें। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
मां को प्रिय भोग
मां शैलपुत्री को शुद्ध गाय के घी से बनी मिठाई या मखाने की खीर का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सफेद या पीली वस्तुएं जैसे दूध और मिठाई चढ़ाना भी अच्छा होता है। इससे मां प्रसन्न होकर भक्तों की इच्छाएं पूरी करती हैं। भोग लगाते समय श्रद्धा का भाव रखें।
आरती और मंत्र का महत्व
आरती में 'शैलपुत्री मां बैल असवार, करें देवता जय जयकार' से आरंभ होकर मां की महिमा का गुणगान किया जाता है। यह आरती सुनकर मन को शांति मिलती है। मंत्र जाप से ऊर्जा का संचार होता है। आज के दिन इस पूजा से नई शुरुआत के लिए शक्ति प्राप्त करें।