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चैत्र नवरात्रि: मां कूष्मांडा की पूजा विधि और महत्व

चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है, जो सृष्टि की रचयिता मानी जाती हैं। इस दिन की पूजा विधि, मंत्र और महत्व के बारे में जानें। भक्त उनकी आराधना से साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करते हैं। जानें कैसे करें उनकी पूजा और क्या है इस दिन का विशेष महत्व।
 

मां कूष्मांडा का चौथा दिन


नई दिल्ली: आज रविवार को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है, जो मां दुर्गा के चौथे स्वरूप, मां कूष्मांडा को समर्पित है। नवरात्रि का यह पर्व 19 मार्च से आरंभ हुआ था और यह दिन विशेष महत्व रखता है। अष्टभुजा देवी के रूप में जानी जाने वाली मां ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड के अंधकार को दूर किया और सूर्य के समान तेज प्रदान किया। भक्त उनकी पूजा से साहस, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।


यह दिन केवल आध्यात्मिक नहीं है, बल्कि जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा भी देता है। घरों में कलश की स्थापना के साथ देवी की आराधना जारी है। पीले रंग का विशेष महत्व है और भोग में मालपुआ प्रमुखता रखता है। आइए जानें पूजा की सरल विधि और मंत्र।


मां कूष्मांडा की महिमा

मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है। जब सृष्टि में केवल अंधकार था, तब उनकी मुस्कान से प्रकाश फैला। उनके आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष-बाण, चक्र, गदा, कमल, अमृत कलश और जपमाला शामिल हैं। उनकी उपासना से रोग, शोक और भय दूर होते हैं, और भक्तों को तेज, बल और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।


पूजा की विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर मां की मूर्ति या चित्र रखें। घी का दीपक जलाएं, पीले फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं। धूप-दीप लगाएं। मुख्य भोग मालपुआ होता है, या पीली मिठाई-हलवा-पूरी चढ़ा सकते हैं। हाथ जोड़कर प्रार्थना करें और क्षमा मांगें।


मंत्र और स्तुति

मूल मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।
बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः।
स्तुति मंत्र: सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
देवी सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी लाभदायक है। रोज 108 बार जप से मन शांत होता है।


आरती: कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी।
पिंगला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी माँ भोली भाली।
... (पूर्ण आरती में ममता और संकट निवारण की प्रार्थना है)। आरती के बाद प्रसाद वितरित करें। यह भक्ति से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।