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जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पूजा विधि और महत्व

जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं और विशेष भोग अर्पित करते हैं। पूजा में पीला चंदन, गंगाजल, और तुलसी के पत्ते शामिल होते हैं। जानें इस पर्व की पूजा विधि, महत्व और कब मनाई जाएगी।
 

जन्माष्टमी का पर्व


नई दिल्ली: जन्माष्टमी का त्योहार भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पर्व पर कुछ विशेष सामग्री का उपयोग करने से पूजा का महत्व बढ़ता है और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।


पूजा की सामग्री

जन्माष्टमी की पूजा के लिए थाली में सबसे पहले पीला चंदन, रोली और गंगाजल रखना चाहिए। गंगाजल का उपयोग भगवान के आचमन और स्नान के लिए किया जाता है। लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री का भोग अर्पित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके साथ ही धनिये की पंजीरी, पंचामृत, फल और मिठाई भी भोग में शामिल की जा सकती हैं।


धार्मिक मान्यता

क्या है धार्मिक मान्यता?


भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी बहुत प्रिय मानी जाती है, इसलिए भोग की थाली में तुलसी के पत्ते अवश्य रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी के बिना भगवान कृष्ण को अर्पित किया गया भोग अधूरा माना जाता है। पूजा के दौरान घी का दीपक, धूपबत्ती, कपूर और रुई की बाती भी रखनी चाहिए।


मोर पंख का महत्व

मोर पंख का क्या है महत्व?


भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में बांसुरी और मोर पंख का विशेष महत्व है। इसके साथ पीले फूलों से लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जा सकता है। पीला रंग भगवान कृष्ण से जुड़ा हुआ माना जाता है, इसलिए पूजा और सजावट में पीले फूल, वस्त्र और अन्य सामग्री का उपयोग शुभ माना जाता है।


जन्माष्टमी की तिथि

जन्माष्टमी 2026 में 04 सितंबर को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 04 सितंबर को रात 02 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत रात 12 बजकर 29 मिनट पर होगी और इसका समापन रात 11 बजकर 04 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 11 बजकर 29 मिनट पर होगा।


पूजा विधि

कैसे करें पूजा?


जन्माष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर और पूजा स्थल की सफाई करके लड्डू गोपाल की पूजा करें। रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा और आरती करने के बाद उन्हें माखन-मिश्री और अन्य भोग अर्पित करें।


इस दिन कृष्ण चालीसा और श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले लोगों को लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन से बचना चाहिए। धार्मिक परंपराओं में इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करने और अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, धन या जरूरत की वस्तुओं का दान करने का भी महत्व बताया गया है।