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नरसिंह जयंती: तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

नरसिंह जयंती हर साल वैशाख माह की चतुर्दशी को मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु के उग्र अवतार का प्रतीक है। इस वर्ष, यह उत्सव 30 अप्रैल को मनाया जाएगा। जानें इस दिन की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व के बारे में। पूजा विधि में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य, और भगवान नरसिंह की आरती शामिल है। इस दिन की पूजा से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
 

नरसिंह जयंती का महत्व

हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिंह जयंती का उत्सव मनाया जाता है। नरसिंह भगवान श्रीहरि विष्णु के उग्र अवतार माने जाते हैं। भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण किया था। इस अवतार में भगवान का आधा शरीर मानव और आधा सिंह का होता है, इसलिए इसे नरसिंह अवतार कहा जाता है। इस वर्ष, नरसिंह जयंती 30 अप्रैल को मनाई जाएगी। आइए, इस दिन की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं...


तिथि और शुभ मुहूर्त

चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 29 अप्रैल 2026 को शाम 07:51 बजे हुई थी, और यह 30 अप्रैल 2026 को सुबह 09:12 बजे समाप्त होगी। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, नरसिंह जयंती 30 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 04:17 से 06:56 बजे तक रहेगा।


पूजन विधि

इस दिन, सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। एक लकड़ी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान नरसिंह की प्रतिमा स्थापित करें। श्रद्धा के साथ भगवान को फल, फूल, नारियल, पंचमेवा, धूप, दीप, अक्षत और पीला वस्त्र अर्पित करें। अंत में भगवान नरसिंह की आरती करें और पूजा में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें।


धार्मिक महत्व

भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा और असुर राजा हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए नरसिंह अवतार लिया। यह पर्व अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन जो लोग पूजा और व्रत करते हैं, उन्हें जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। भगवान नरसिंह का प्राकट्य संध्या काल में हुआ था, इसलिए इस समय उनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।