निर्जला एकादशी: महत्व और व्रत के नियम
निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे पूरे साल में 24 एकादशियों में से एक माना जाता है। इस दिन अन्न-जल का त्याग किया जाता है, जिससे यह व्रत विशेष फलदायी होता है। व्रत का पारण द्वादशी तिथि को करना आवश्यक है, और इस दौरान हरि वासर का ध्यान रखना जरूरी है। जानें इस व्रत के नियम, पारण का सही समय और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।
Jun 24, 2026, 11:02 IST
निर्जला एकादशी का महत्व
सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। सालभर में 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन अन्न और जल का त्याग किया जाता है, जिससे यह व्रत अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है।
व्रत के नियम और पारण
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि व्रत को सही तरीके से किया जाए तो साधक को सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
व्रत का पारण न करने पर साधक का व्रत सफल नहीं होता। इसलिए द्वादशी तिथि को व्रत का पारण करना आवश्यक है। पारण करते समय हरि वासर की अवधि का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस समय व्रत का पारण करना वर्जित है।
हरि वासर की जानकारी
हरि वासर क्या है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वादशी तिथि के प्रारंभिक भाग को हरि वासर कहा जाता है। इस समय एकादशी व्रत का पारण करना शुभ नहीं माना जाता। यदि द्वादशी तिथि 24 घंटे की है, तो उसके पहले लगभग 6 घंटे हरि वासर कहलाते हैं। इसलिए इस अवधि के समाप्त होने के बाद ही पारण करना चाहिए।
पारण में हरि वास का ध्यान
हरि वास का ध्यान क्यों आवश्यक है?
निर्जला एकादशी का व्रत कठिन होता है। यदि पारण करते समय हरि वास का ध्यान नहीं रखा गया, तो व्रत का फल प्राप्त नहीं होता। हरि वासर के समय पारण करने से व्रत निष्फल हो जाता है। इसलिए एकादशी व्रत करने से पहले इसके नियमों को जान लेना आवश्यक है।
निर्जला एकादशी में पानी पीने का समय
पानी कब पीना चाहिए?
निर्जला एकादशी व्रत में पानी पीने का सही समय पारण के समय होता है। एकादशी तिथि की शुरुआत से लेकर द्वादशी तक सूर्योदय तक पानी नहीं पीना चाहिए।
निर्जला एकादशी की तिथि
निर्जला एकादशी कब है?
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 24 जून को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 25 जून को रात 08 बजकर 09 मिनट पर
निर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण
व्रत पारण का समय
निर्जला एकादशी व्रत का पारण करने का समय- 26 जून को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक