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परमा एकादशी: महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा

परमा एकादशी, जो 11 जून को मनाई जाएगी, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। अधिकमास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। जानें इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथाएँ, जो इसे विशेष बनाती हैं। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है, जिससे भक्तों को अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।
 

परमा एकादशी का महत्व

11 जून को परमा एकादशी का व्रत मनाया जाएगा, जो हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिकमास में आने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह एकादशी पवित्र मानी जाती है, और इसे करने से व्रति को पूरा पुण्यफल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं परमा एकादशी के महत्व और पूजा विधि के बारे में।


परमा एकादशी व्रत की जानकारी

इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। भक्तजन अन्न, धन और अन्य वस्तुओं का दान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, परमा एकादशी का व्रत करने से साधक के जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। इस दिन कुछ गलतियों से साधक को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। एकादशी तिथि को भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए पवित्र माना गया है। अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह लगभग तीन वर्ष में एक बार आती है।


परमा एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, परमा एकादशी की तिथि 11 जून 2026 को प्रातः 12:57 बजे शुरू होगी और रात 10:36 बजे समाप्त होगी। इस दिन व्रत का आयोजन गुरुवार को किया जाएगा।


परमा एकादशी का विशेष महत्व

‘परमा’ का अर्थ सर्वोत्तम होता है, इसलिए इसे सभी एकादशियों में विशेष फलदायी माना गया है। यह व्रत दरिद्रता और पापों से मुक्ति दिलाने वाला है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, धन के देवता कुबेर ने इसी व्रत के प्रभाव से भगवान शिव की कृपा प्राप्त की थी। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी परमा एकादशी के पुण्य से अपना खोया हुआ वैभव पुनः प्राप्त किया। जो भक्त इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करता है, उसे मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।


परमा एकादशी पर पूजा विधि

इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। घर के मंदिर को शुद्ध कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को पीले पुष्प, धूप, दीप, चंदन, पंचामृत और फल अर्पित करें। पूजा के बाद परमा एकादशी की कथा सुनें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। रात्रि जागरण का विशेष महत्व है, जिसमें भक्तजन भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करते हैं।


परमा एकादशी पर दान का महत्व

दान को धर्म का प्रमुख आधार माना गया है। परमा एकादशी के दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। स्कन्द पुराण में कहा गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति को अपने अर्जित धन का एक भाग ईश्वर की प्रसन्नता के लिए अवश्य लगाना चाहिए।


परमा एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा

काम्पिल्य नगर में सुमेधा नाम का एक धार्मिक लेकिन गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ रहता था। अत्यधिक निर्धनता के बावजूद, उसकी पत्नी ने कभी शिकायत नहीं की। एक दिन कौण्डिन्य मुनि ने उन्हें परमा एकादशी का व्रत करने का उपाय बताया। व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें धन-धान्य का आशीर्वाद दिया।


परमा एकादशी पर महाउपाय

इस दिन व्यक्ति को पीले वस्त्र, फल, मिष्ठान और चने की दाल का दान करना चाहिए। श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ सभी कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। तुलसी जी की विशेष पूजा करने से लक्ष्मी और नारायण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।