×

परिवर्तिनी एकादशी: जानें इस पावन पर्व का महत्व और शुभ मुहूर्त

22 सितंबर को मनाई जा रही परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है, जिससे पापों का नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जानें इस पर्व का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
 

परिवर्तिनी एकादशी का पावन पर्व


नई दिल्ली: आज, 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का विशेष पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन आता है, जिसे पद्मा एकादशी और जयंती एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यदि आप कहीं इन नामों का उल्लेख देखें, तो यह इसी परिवर्तिनी एकादशी का संदर्भ है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की पूजा से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति को इस जीवन में सुख और समृद्धि मिलती है, साथ ही परलोक में मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी सरल हो जाता है।


शुभ मुहूर्त का समय

जानें शुभ मुहूर्त का सही समय


परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर की रात 8 बजे से आरंभ हो चुकी है और यह 22 सितंबर की रात 9 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी। इस व्रत का पारण 23 सितंबर की सुबह 6 बजकर 10 मिनट से लेकर 8 बजकर 35 मिनट के बीच किया जाएगा।


वामन स्वरूप की पूजा का महत्व

वामन स्वरूप की होती है विशेष पूजा


इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। वामन अवतार भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक माने जाते हैं। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर विष्णु भगवान की आराधना करते हैं और सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।


अगर किसी व्यक्ति को संतान सुख, धन-समृद्धि या जीवन में उन्नति की इच्छा है, तो परिवर्तिनी एकादशी का व्रत उसके लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है। इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और भगवान गणेश की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसलिए, परिवर्तिनी एकादशी को पापों के नाश, संतान सुख, विद्या-बुद्धि और धन-समृद्धि की कामना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए व्रत-पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।