पापमोचनी एकादशी: महत्व और व्रत कथा
पापमोचनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है, जिसमें भगवान विष्णु का आशीर्वाद और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस लेख में, हम पापमोचनी एकादशी की कथा और पूजा विधि के बारे में जानेंगे, जो सभी पापों को समाप्त करने में सहायक मानी जाती है। जानें इस व्रत का महत्व और इसे कैसे सही तरीके से करना चाहिए।
Mar 15, 2026, 11:25 IST
पापमोचनी एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यधिक महत्व है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी का व्रत मनाया जाता है। आज, 15 मार्च को, इस विशेष दिन का व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और माता लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह व्रत सभी पापों को समाप्त करने वाला है। ब्रह्मांड पुराण में उल्लेख है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इस व्रत का पालन करता है और श्री विष्णु जी की पूजा माता लक्ष्मी के साथ करता है, उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
पापमोचनी एकादशी की कथा
पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा
प्राचीन काल में च्यवन ऋषि का पुत्र मेधावी वन में कठोर तप कर रहा था। उसकी तपस्या से देवराज इंद्र चिंतित हो गए और उन्होंने तपस्या को भंग करने के लिए मंजुघोषा नाम की अप्सरा को भेजा। मंजुघोषा ने अपनी सुंदरता और नृत्य से मेधावी मुनि को आकर्षित कर लिया। काम के प्रभाव में आकर मेधावी मुनि ने अपनी तपस्या को भुला दिया और कई वर्षों तक भोग-विलास में लिप्त रहे। जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और पता चला कि उनकी तपस्या नष्ट हो गई है, तो उन्होंने बहुत पछताया और मंजुघोषा को 'पिशाचनी' बनने का श्राप दे दिया।
मंजुघोषा मुनि के चरणों में गिरकर क्षमा मांगने लगी। मुनि ने दया दिखाते हुए उसे उद्धार का उपाय बताया। उन्होंने कहा कि यदि तुम चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करोगी, तो तुम्हारे सभी पाप समाप्त हो जाएंगे और तुम पुनः अपने दिव्य रूप को प्राप्त करोगी। मेधावी मुनि ने अपने पिता च्यवन ऋषि से भी अपने पाप का प्रायश्चित पूछा। पिता ने उन्हें भी इसी 'पापमोचनी एकादशी' का व्रत रखने की सलाह दी। दोनों ने श्रद्धा से इस व्रत का पालन किया। परिणामस्वरूप, अप्सरा पिशाच योनि से मुक्त होकर स्वर्ग चली गई और मेधावी मुनि का तेज वापस लौट आया।
पूजा विधि और कथा का पाठ
कैसे पूजा करें और कथा का पाठ
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद व्रत कथा को पढ़ें और विश्वास रखें कि भगवान का आशीर्वाद आपके साथ है।
- किसी जरूरतमंद को अन्न और पीले वस्त्र का दान करें।