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पुष्कर का राजराजेश्वरी मणिवेदिका शक्तिपीठ: एक अद्भुत धार्मिक स्थल

पुष्कर का राजराजेश्वरी मणिवेदिका शक्तिपीठ, भारत के 52 शक्तिपीठों में से एक है, जिसे 27वां शक्तिपीठ माना जाता है। यहां मां सती के हाथ की कलाइयां गिरी थीं, और यह स्थान धार्मिक मान्यता के अनुसार अद्भुत महत्व रखता है। जानें इस पवित्र स्थल की पौराणिक कथा और इसके अद्वितीय धार्मिक महत्व के बारे में।
 

भारत के शक्तिपीठों में अद्वितीय स्थान

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में आदिशक्ति मां के 52 शक्तिपीठों में से एक है पुष्कर का राजराजेश्वरी मणिवेदिका शक्तिपीठ। इसे 27वां शक्तिपीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां मां सती के हाथ की कलाइयां गिरी थीं। इस पवित्र स्थल पर मां आदिशक्ति और मां गायत्री एक साथ विराजमान हैं। स्थानीय लोग इसे चामुंडा माता के नाम से भी जानते हैं। स्कंद पुराण में भी इस स्थान का उल्लेख मिलता है।


27वां शक्तिपीठ

पुष्कर, जो कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा की नगरी है, में जगत जननी माता का 27वां शक्तिपीठ स्थित है। सावित्री मां की पहाड़ी के निकट पुरूहोता पर्वत है। मान्यता है कि यहां मां सती के दोनों हाथों की कलाइयां गिरी थीं, जिससे पर्वत के बीच एक विशाल गड्ढा बन गया। इस स्थान तक पहुंचना कठिन है। कहा जाता है कि मां की एक बुजुर्ग भक्त की प्रार्थना पर मां पहाड़ी के तलहटी में आई थीं। सदियों से यह स्थान गुप्त और अज्ञात रहा है। पुष्कर आने वाले भक्तों को इस शक्तिपीठ के बारे में कम जानकारी होती है, और अन्य प्रसिद्ध मंदिरों की तरह इसका विकास नहीं हो सका है।


पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाराज दक्ष प्रजापति की पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। लेकिन महाराजा दक्ष इस विवाह से खुश नहीं थे। जब प्रजापति दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया, तो सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन अपने दामाद और पुत्री को नहीं बुलाया। सती बिना आमंत्रण के अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल होने गईं। वहां दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर सती ने अग्निकुंड में अपनी देह का त्याग कर दिया।


मणिबंध का गिरना

जब सती ने देहत्याग किया, तो भगवान शिव ने मां सती की देह को अपने हाथों में उठाकर ब्रह्मांड में भटकने लगे, जिससे सृष्टि में हाहाकार मच गया। इस स्थिति में श्रीविष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से मां सती की देह के टुकड़े कर दिए। जहां-जहां मां सती के शरीर के टुकड़े गिरे, वहां शक्तिपीठ बन गए। पुष्कर में पुरुहोता पर्वत पर मां सती के दोनों हाथ के मणिबंध गिरे थे।