बड़े मंगल: श्रद्धा और सेवा का पर्व
बड़े मंगल का महत्व
नई दिल्ली: मई और जून की गर्मी, तपती धूप और लू के थपेड़ों के बीच उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ और अवध क्षेत्र में बड़े मंगल का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, ज्येष्ठ मास का पहला बड़ा मंगल 5 मई को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई और विभिन्न स्थानों पर भंडारे आयोजित किए गए।
बड़े मंगल का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। यह दिन भगवान हनुमान को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों के सभी संकट समाप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
इस साल का विशेष संयोग
इस साल क्या है खास?
इस वर्ष ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। विशेष बात यह है कि 17 मई से 15 जून तक अधिक मास भी रहेगा, जिसके कारण इस बार कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जो एक दुर्लभ संयोग है। आमतौर पर इतने बड़े मंगल एक साथ नहीं आते।
बड़े मंगल का सामाजिक संदेश
क्या होता है बड़े मंगल का सामाजिक संदेश?
बड़े मंगल का सामाजिक संदेश भी महत्वपूर्ण है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर प्याऊ लगाए जाते हैं, जहां लोगों को ठंडा पानी दिया जाता है। कई जगहों पर शरबत, गुड़, चना और भोजन का वितरण किया जाता है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता करना और सेवा भाव को बढ़ावा देना है।
पौराणिक मान्यता
क्या है पौराणिक मान्यता?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवार को भगवान हनुमान की पहली मुलाकात भगवान श्रीराम से हुई थी। एक अन्य कथा में कहा गया है कि इसी दिन हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप धारण कर भीम का घमंड तोड़ा था। इसी कारण इसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है।
भीषण गर्मी में मनाया जाने वाला यह पर्व श्रद्धा, सेवा और संयम का संदेश देता है, और यही कारण है कि बड़े मंगल का महत्व हर साल बढ़ता जा रहा है।