बद्रीनाथ धाम में सर्दियों में पूजा की व्यवस्था: जानें कहां होती है पूजा
हर साल सर्दियों में बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होते हैं, जिससे भगवान बद्री विशाल की पूजा का स्थान बदल जाता है। जानें कि यह पूजा जोशीमठ के श्री नरसिंह मंदिर में कैसे होती है और इस प्रक्रिया का धार्मिक महत्व क्या है। इस लेख में हम आपको इस परंपरा के बारे में विस्तार से बताएंगे, जिससे आप जान सकें कि श्रद्धालु कैसे इस विशेष अवसर पर पूजा में भाग लेते हैं।
Jun 23, 2026, 17:17 IST
बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया
हर वर्ष सर्दियों के आगमन के साथ, बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस समय क्षेत्र में बर्फबारी होती है और तापमान बहुत कम हो जाता है। कपाट बंद होने की तिथि हर साल दशहरा के बाद निर्धारित की जाती है, जो एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना मानी जाती है। जब मंदिर के कपाट बंद होते हैं, तब भगवान बद्री विशाल की पूजा की जाती है। इस स्थिति में, यह सवाल उठता है कि जब कपाट बंद होते हैं, तो बद्री विशाल की पूजा कहां होती है।
बद्री विशाल की पूजा का स्थान
जानकारी के अनुसार, बर्फबारी के दौरान भगवान बद्री विशाल की पूजा को उनके शीतकालीन गद्दी स्थल पर स्थानांतरित किया जाता है। सर्दियों में, बद्री विशाल की पूजा जोशीमठ के श्री नरसिंह मंदिर में की जाती है। इस दौरान, बद्रीनाथ मंदिर से भगवान के प्रतिनिधियों के रूप में कुबेर जी और उद्धव जी की डोली भी जोशीमठ लाई जाती है।
यह सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, मुख्य पुजारी और अन्य लोग एक विशेष धार्मिक यात्रा के माध्यम से भगवान की गद्दी को जोशीमठ ले जाते हैं। श्रद्धालु इस दौरान श्री नरसिंह मंदिर में जाकर बद्री विशाल की पूजा और दर्शन कर सकते हैं।