मंगला गौरी व्रत 2026: पूजा विधि और महत्व
मंगला गौरी व्रत का महत्व
नई दिल्ली: सावन के महीने का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाहित महिलाएं इस व्रत को अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए करती हैं।
इस वर्ष मंगला गौरी व्रत के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजा करने से माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यता
क्या है धार्मिक मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा के समय काले और नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। इसके बजाय लाल, पीला, हरा या नारंगी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। ये रंग मंगल, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं।
इस दिन माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने का विशेष महत्व है। पूजा में सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, महावर, चुनरी और अन्य सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, पूजा के बाद इस सामग्री का दान किसी जरूरतमंद सुहागिन महिला को करना शुभ माना जाता है।
पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
किन-किन बातों का रखें ध्यान?
मंगला गौरी व्रत के दौरान शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। व्रती को सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और पूरे दिन संयम का पालन करना चाहिए।
कैसे करें पूजा-पाठ?
पूजा को जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। माता गौरी और भगवान शिव की विधिवत पूजा करने के बाद आरती अवश्य करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि बिना आरती के पूजा अधूरी मानी जाती है। पूजा के दौरान पूरे मन से मंत्र जाप और प्रार्थना करना भी शुभ माना जाता है।
व्रत के दिन अपने व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े बुजुर्गों का सम्मान करना, पति का आदर करना, किसी से कटु वचन न बोलना और क्रोध से बचना चाहिए। घर में प्रेम, शांति और सौहार्द का वातावरण बनाए रखना इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा, नियम और विधि विधान से किया गया मंगला गौरी व्रत माता पार्वती की कृपा दिलाता है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।