मई 2026 में पूर्णिमा का अद्भुत संयोग: जानें धार्मिक महत्व और शुभ कार्य
विशेष ज्योतिषीय संयोग का आगाज़
नई दिल्ली: मई 2026 की शुरुआत एक अनोखे ज्योतिषीय संयोग के साथ हुई है, जिसने इस पूरे महीने को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार मई की शुरुआत और अंत दोनों ही पूर्णिमा तिथि पर हो रहे हैं, जो एक दुर्लभ घटना मानी जाती है।
इस विशेष योग के कारण पूरे महीने को पूजा-पाठ, स्नान और दान के लिए अत्यंत शुभ बताया जा रहा है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों से जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं और मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
पूर्णिमा से प्रारंभ हुआ मई का महीना
मई की शुरुआत 1 तारीख को वैशाख पूर्णिमा से हुई है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराओं में अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और जल दान करना विशेष फलदायी होता है। वहीं बौद्ध परंपरा में यह दिन इसलिए खास है क्योंकि इसी तिथि पर भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था।
महीने के अंत में फिर पूर्णिमा
मई का अंतिम दिन यानी 31 मई को भी पूर्णिमा तिथि पड़ रही है। यह ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा होगी, जो अपने आप में बेहद विशेष मानी जाती है।
अधिक पूर्णिमा का महत्व
अधिकमास लगभग ढाई से तीन साल में एक बार आता है और इस दौरान पड़ने वाली पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा भी कहा जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलने की मान्यता है।
शास्त्रों में बताया गया महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत, पूजा और दान से व्यक्ति को सफलता और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। इसे 'सर्व सिद्धिदायिनी' तिथि भी कहा जाता है।
पूरे महीने करें ये शुभ कार्य
इस पूरे महीने विशेष रूप से पूर्णिमा के दिन व्रत रखना लाभकारी माना गया है। साथ ही भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और सत्यनारायण कथा का श्रवण करना शुभ फल देने वाला बताया गया है।
इसके अलावा गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान कर अन्न, वस्त्र और धन का दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।