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मकर संक्रांति 2023: विशेष संयोग और पूजा विधि

मकर संक्रांति 2023 इस बार विशेष संयोग के साथ आ रही है। 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, साथ ही षटतिला एकादशी का भी संयोग है। जानें इस दिन पूजा और दान के नियम, ज्योतिषाचार्यों की सलाह और धार्मिक मान्यताएँ। क्या आप जानते हैं कि इस दिन खिचड़ी का दान कब करना चाहिए? जानें सभी महत्वपूर्ण जानकारी इस लेख में।
 

मकर संक्रांति का महत्व

नई दिल्ली: इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व विशेष संयोग के साथ मनाया जा रहा है। 14 जनवरी को सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन षटतिला एकादशी का भी संयोग है, जिसके कारण पूजा और दान के नियमों में बदलाव किया गया है। तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति थी, जिसे ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट किया है।


पूजन और दान का समय

ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार, मकर संक्रांति का पूजन और व्रत 14 जनवरी को करना सबसे अच्छा रहेगा। हालांकि, खिचड़ी का दान 15 जनवरी को करना उचित बताया गया है। 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल शुरू होगा, जो शाम 5:41 बजे तक रहेगा।


महत्वपूर्ण योग और धार्मिक मान्यताएँ

इस दिन सूर्य देव की पूजा, तिल और गुड़ का दान, और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य रुचि कपूर के अनुसार, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। इसी दिन खरमास की समाप्ति होगी, जिससे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि के कारण 14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित रहेगा।


एकादशी तिथि का महत्व

प्रेरणा ज्योतिष अनुसंधान के अध्यक्ष ने बताया कि एकादशी तिथि 14 जनवरी को शाम 5:53 बजे समाप्त होगी। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी। संध्या के बाद अन्य दान किए जा सकते हैं, लेकिन खिचड़ी दान के लिए 15 जनवरी की सुबह का समय अधिक उपयुक्त रहेगा।


संक्रांति की संख्या

ज्योतिष अन्वेषक अमित गुप्ता ने भी इसी नियम का पालन करने की सलाह दी है। मकर संक्रांति को सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य एक माह में एक राशि में गोचर करते हैं, जिससे एक वर्ष में बारह संक्रांतियां होती हैं। इनमें मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसी दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।