मकर संक्रांति 2024: विशेष ज्योतिषीय संयोग और धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति का पर्व और ज्योतिषीय संयोग
इस वर्ष मकर संक्रांति का पावन पर्व बुधवार को विशेष ज्योतिषीय संयोग के साथ मनाया जाएगा। आज सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा, जिससे संक्रांति का पुण्यकाल आरंभ होगा। इस दिन षटतिला एकादशी का शुभ संयोग भी बन रहा है, जो इस पर्व के धार्मिक महत्व को और बढ़ा देता है।
14 जनवरी को पूजन और व्रत का महत्व
मकर संक्रांति के दिन पूजन और व्रत करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और षटतिला एकादशी का संयोग भी रहेगा, जिससे धार्मिक अनुष्ठानों का फल विशेष रूप से लाभकारी होगा।
विशेष पुण्यकाल का समय
आज दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल की शुरुआत होगी, जो शाम 5:41 बजे तक चलेगा। इस समय में सूर्य पूजन, तिल-गुड़ का दान और भगवान विष्णु की आराधना को अत्यधिक शुभ माना गया है।
सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग
आज सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है। इसी दिन खरमास का अंत होगा, जिससे विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत संभव होगी।
दान का महत्व
एकादशी तिथि के कारण 14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित रहेगा। एकादशी तिथि शाम 5:53 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद द्वादशी प्रारंभ होगी। श्रद्धालु संध्या के बाद दान कर सकते हैं, लेकिन 15 जनवरी की सुबह खिचड़ी दान करना अधिक उपयुक्त रहेगा।
उत्तरायण का आरंभ
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, सूर्य हर महीने एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करता है, जिसे संक्रांति कहा जाता है। एक वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं, जिनमें मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं।
धार्मिक मान्यता
Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.