मांगलिक दोष: जानें इसके अर्थ, प्रभाव और उपाय
मांगलिक दोष भारतीय ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण विषय है, जो विवाह में देरी और जीवन में चुनौतियों से जुड़ा होता है। जानें मांगलिक दोष का अर्थ, इसके प्रभाव और इसे दूर करने के उपाय। क्या यह दोष 28 वर्ष की उम्र के बाद समाप्त हो जाता है? इस लेख में हम आपको सभी जानकारी देंगे, जिससे आप इस ज्योतिषीय स्थिति को बेहतर समझ सकें।
Feb 28, 2026, 15:57 IST
मांगलिक दोष का परिचय
भारतीय संस्कृति में जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो उसकी कुंडली बनाई जाती है। कई बार यह कुंडली जन्म के समय ही तैयार कर ली जाती है, जबकि कुछ लोग इसे 5 साल की उम्र के बाद बनवाते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि कुंडली में मंगल की स्थिति के कारण मांगलिक दोष उत्पन्न होता है, जिससे विवाह में देरी हो सकती है। यदि बच्चे की कुंडली में मांगलिक दोष पाया जाता है, तो यह माना जाता है कि उसके जीवन में उतार-चढ़ाव बने रहेंगे।
मांगलिक दोष का अर्थ
जब लोग मांगलिक शब्द सुनते हैं, तो वे इसे विवाह से जुड़ी समस्याओं से जोड़ते हैं। लेकिन इसका अर्थ इससे कहीं अधिक है। मंगल का अर्थ है शुभता, यानी हर कार्य में सकारात्मक परिणाम लाना। कुंडली में मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और व्यक्ति की इच्छाशक्ति का प्रतीक है। जब किसी जातक की कुंडली में मंगल ग्रह कुछ विशेष भावों में होता है, जैसे कि पहला, चौथा, सातवां, आठवां या बारहवां भाव, तो उसे मांगलिक माना जाता है।
मांगलिक दोष कब लगता है
ज्योतिष के अनुसार, मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय स्थिति है, जो जातक के वैवाहिक और पेशेवर जीवन में कठिनाइयाँ ला सकती है। यह तब पहचाना जाता है जब मंगल ग्रह जन्म कुंडली के विशिष्ट भावों में होता है। हिंदू धर्म में, मांगलिक दोष का विवाह से सीधा संबंध होता है। यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में हो, तो उसे मांगलिक दोष से ग्रस्त माना जाता है।
मांगलिक दोष का जीवन पर प्रभाव
ज्योतिष में मंगल ग्रह को सेनापति माना जाता है, जो ऊर्जा, बल और आत्मविश्वास का स्वामी है। कभी-कभी मंगल के अशुभ फल भी देखने को मिलते हैं। नवग्रहों में सूर्य के बाद मंगल सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है। यदि आपकी कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में है या अन्य ग्रहों के साथ अशुभ युति में है, तो यह जीवन में मांगलिक दोष के कुछ नकारात्मक परिणाम ला सकता है। इससे जातक का क्रोध बढ़ सकता है और नौकरी या व्यापार में नुकसान हो सकता है।
मांगलिक दोष के उपाय
यदि आपकी कुंडली में मांगलिक दोष है, तो एक व्रत इस दोष से उत्पन्न दुर्भाग्य को दूर कर सकता है। मंगलवार का व्रत करने से आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं।
मांगलिक दोष को समाप्त करने के लिए रोजाना सुबह और शाम को हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। मंगलवार के दिन लाल कपड़े पहनना भी लाभकारी होता है।
कब समाप्त होता है मांगलिक दोष
यह माना जाता है कि 28 वर्ष की आयु के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस उम्र के बाद मंगल का प्रभाव कम हो जाता है, क्योंकि यह वह समय है जब मंगल की ऊर्जा स्थिर हो जाती है। यदि किसी जातक की शादी 28 वर्ष की उम्र के बाद होती है, तो मांगलिक दोष का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। हालांकि, यदि कुंडली में मंगल की महादशा या अंतरदशा चल रही है, तो उस समय इसका प्रभाव अधिक हो सकता है।