मुरुदेश्वर मंदिर: शिव की विशाल मूर्ति और रावण की पौराणिक कथा
मुरुदेश्वर मंदिर, जो भगवान शिव को समर्पित है, कर्नाटक के कन्नड़ जिले में स्थित है। यह मंदिर रावण की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें शिवलिंग की स्थापना और उसकी अद्भुत कहानी शामिल है। यहाँ भगवान शिव की विशाल मूर्ति है, जो दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची शिव प्रतिमा मानी जाती है। इस मंदिर का दृश्य समुद्र तट पर होने के कारण बेहद आकर्षक है। जानें इस मंदिर के इतिहास और महत्व के बारे में और भी रोचक तथ्य।
May 7, 2026, 11:30 IST
भारत के प्राचीन मंदिरों की विशेषता
भारत एक ऐसा देश है जहाँ अनेक प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जिनका इतिहास कई युगों से जुड़ा हुआ है। इनमें से एक मंदिर है, जिसका संबंध रामायण काल से है और यह दशानन रावण से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर कर्नाटक के कन्नड़ जिले की भटकल तहसील में स्थित है, जो तीन ओर से अरब सागर से घिरा हुआ है। समुद्र तट पर होने के कारण, इस मंदिर का दृश्य अत्यंत आकर्षक है।
मुरुदेश्वर मंदिर का महत्व
हम बात कर रहे हैं मुरुदेश्वर मंदिर की, जो भगवान शिव को समर्पित है। मुरुदेश्वर भगवान शिव का एक नाम है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ भगवान शिव की एक विशाल मूर्ति स्थापित है, जिसे दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची शिव प्रतिमा माना जाता है। पहले इस शहर का नाम मृदेश्वर था, लेकिन मंदिर के निर्माण के बाद इसका नाम मुरुदेश्वर रखा गया।
दशानन रावण की कथा
दशानन रावण से संबंध
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब रावण अमरता का वरदान पाने के लिए भगवान शिव की तपस्या कर रहा था, तब भगवान शिव ने उसे एक शिवलिंग दिया, जिसे आत्मलिंग कहा जाता है। महादेव ने रावण से कहा कि यदि वह अमर होना चाहता है, तो उसे इस शिवलिंग को लंका में स्थापित करना होगा। लेकिन शिवलिंग को जिस स्थान पर रखा जाएगा, वह वहीं स्थापित हो जाएगा। रावण शिवलिंग लेकर लंका की ओर बढ़ा।
रास्ते में भगवान गणेश ने चालाकी से रावण को गोकर्ण में शिवलिंग रखने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे वह वहीं स्थापित हो गया। इससे रावण क्रोधित हुआ और शिवलिंग को नष्ट करने की कोशिश की। इस प्रक्रिया में, शिवलिंग को ढकने वाला वस्त्र म्रिदेश्वर के कन्दुका पर्वत पर गिर गया। म्रिदेश्वर अब मुरुदेश्वर के नाम से जाना जाता है। शिव पुराण में इस कथा का विस्तार से वर्णन किया गया है।
विशाल शिव मूर्ति
विशाल शिव मूर्ति
यहाँ स्थापित भगवान शिव की मूर्ति की ऊँचाई लगभग 123 फुट है। इसे इस प्रकार बनाया गया है कि सूर्य की किरणें दिनभर इस पर पड़ती हैं। मूर्ति का रंग चांदी जैसा है, जिससे सूर्य की किरणें पड़ने पर यह और भी विशाल प्रतीत होती है। यह शिव प्रतिमा इतनी ऊँची है कि इसे दूर से भी देखा जा सकता है, और यहाँ पर इसे देखने के लिए लिफ्ट भी उपलब्ध है।
इस मूर्ति के निर्माण में लगभग 5 साल का समय लगा और इसकी लागत करीब 5 करोड़ रुपए आई। इस मंदिर को देखने के लिए न केवल देश के लोग, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।