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मोहिनी एकादशी: पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

मोहिनी एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे समुद्र मंथन से जुड़े धार्मिक मान्यताओं से जोड़ा गया है। इस लेख में हम आपको मोहिनी एकादशी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्रों के बारे में विस्तार से बताएंगे। जानें कैसे इस दिन व्रत रखने से आप मोह माया से मुक्ति पा सकते हैं।
 

मोहिनी एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। साल में कुल 24 एकादशी आती हैं, लेकिन इस वर्ष अधिक मास के कारण 26 एकादशी मनाई जाएंगी। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन समुद्र मंथन से अमृत का कलश निकला था, जिसके लिए देवताओं और राक्षसों के बीच संघर्ष हुआ। भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर धर्म की रक्षा की, इसलिए इस दिन को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को मोह माया से मुक्ति मिलती है। आइए, हम आपको पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्रों की जानकारी देते हैं।


मोहिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, मोहिनी एकादशी का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से 12:45 बजे तक है। दूसरा अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त प्रात: 05:44 बजे से 07:23 बजे तक है, और तीसरा ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:17 बजे से 05:01 बजे तक है। व्रत का पारण 28 अप्रैल को सुबह 05:47 बजे से 08:21 बजे तक किया जाएगा।


मोहिनी एकादशी की पूजा विधि

- सबसे पहले, सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ या पीले वस्त्र पहनें। पूजा घर में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की मूर्ति स्थापित करें।


- हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें कि आप अपनी मनोकामना की पूर्ति या प्रभु भक्ति के लिए यह व्रत कर रहे हैं।


- भगवान की मूर्ति को गंगाजल और फिर पंचामृत से स्नान कराएं।


- इसके बाद, साफ जल से स्नान कराकर मूर्ति को पीले वस्त्र पहनाएं।


- भगवान विष्णु को पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीले फूलों के साथ वैजयंती के फूल अर्पित करें।


- शुद्ध घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती से वातावरण को सुगंधित करें। भगवान को पीले फलों और मिठाई का भोग अर्पित करें।


- ध्यान रखें कि भगवान विष्णु के भोग में तुलसी का होना अनिवार्य है, क्योंकि बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते।


इन मंत्रों का जाप करें

- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय


- स्तुति मंत्र: 'शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं' का अर्थ है, जिनकी आकृति शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है और जो देवताओं के भी ईश्वर हैं, उन श्री विष्णु को मैं प्रणाम करता हूं।


- मोहिनी स्वरुप का ध्यान मंत्र: "ॐ मोहिनी स्वरूपाय नमः" का अर्थ है, भगवान के उस मोहिनी स्वरुप को नमस्कार है, जो अज्ञानता और अंधकार को दूर करता है और साधक को सत्य के मार्ग पर ले जाता है।