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मौनी अमावस्या 2026: धार्मिक महत्व और विशेष तिथियाँ

मौनी अमावस्या 2026 का महत्व जानें, जो हिंदू धर्म में एक पवित्र दिन है। यह दिन स्नान, दान और पितरों के तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। जानें इस दिन के धार्मिक अनुष्ठान, स्नान का शुभ समय और प्रयागराज व हरिद्वार के महत्व के बारे में।
 

मौनी अमावस्या का महत्व


नई दिल्ली: मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है। यह माघ मास की अमावस्या है, जब सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में एक साथ होते हैं। इस दिन स्नान, दान, जप, तप और पितरों के तर्पण का विशेष महत्व है। कड़ाके की सर्दी में मौन व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।


2026 की मौनी अमावस्या

2026 की मौनी अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह प्रयागराज के माघ मेले के प्रमुख स्नान पर्व के साथ मेल खा रही है। इसे शाही स्नान का दर्जा दिया गया है। श्रद्धालु इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान और तर्पण जीवन में सुख और समृद्धि लाता है।


वैदिक कैलेंडर के अनुसार

वैदिक कैलेंडर के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 17 जनवरी 2026 की रात 12:04 बजे शुरू होगी और 18 जनवरी 2026 की रात 1:22 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन धार्मिक अनुष्ठान सूर्योदय के बाद मान्य होते हैं, इसलिए यही दिन स्नान और दान के लिए सर्वोत्तम रहेगा।


स्नान का उत्तम समय

मौनी अमावस्या पर स्नान का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय तक माना जाता है। 2026 में सुबह 04:43 बजे से 05:23 बजे तक का समय स्नान के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। इस समय नदी में स्नान करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। यदि नदी तक पहुंचना संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्य प्रदान करता है।


पितरों का तर्पण

इस पवित्र दिन पर पितरों का तर्पण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। स्नान के बाद तिल मिश्रित जल से पितरों का तर्पण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पितरों को शांति और मोक्ष का आशीर्वाद मिलता है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और उपयोगी चीजों का दान करने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं।


प्रयागराज और हरिद्वार का महत्व

प्रयागराज और हरिद्वार में माघ के पावन काल में स्नान को मोक्षदायी माना जाता है। मान्यता है कि इन तीर्थों पर मौनी अमावस्या का स्नान अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य देता है। इस दिन भक्त मौन व्रत रखते हुए ध्यान और जप करते हैं। ठंडी हवा में जल में उतरना कठिन है, लेकिन यही तपस्या इसे विशेष बनाती है।


मौन रहकर ईश्वर का स्मरण

तर्पण और दान के अलावा, मौनी अमावस्या पर मौन रहकर ईश्वर का स्मरण करने का भी विशेष महत्व है। मौन रहने से मन की चंचलता कम होती है और साधना का फल जल्दी मिलता है। दान-स्नान के बाद भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है। यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने और पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने का पवित्र अवसर है।