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रमजान 2026: दूसरे रोजे की विशेषताएँ और इफ्तार का समय

रमजान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है, जिसमें इबादत का माहौल गहरा हो गया है। दूसरे रोजे के महत्व, इफ्तार के समय और जुमे की नमाज की विशेषताएँ जानें। विभिन्न शहरों में इफ्तार का समय अलग-अलग है, और रोजा रखने के दौरान ध्यान देने योग्य बातें भी महत्वपूर्ण हैं। इस लेख में रमजान के इस विशेष महीने की आध्यात्मिक यात्रा के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
 

रमजान का पवित्र महीना

नई दिल्ली: रमजान का पवित्र महीना आरंभ होते ही इबादत का माहौल और भी गहरा हो गया है। कल पहले रोजे के साथ 30 दिनों की यह आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई और आज जुमे के दिन दूसरा रोजा रखा जा रहा है। मस्जिदों में नमाज की तैयारियाँ जोरों पर हैं और घरों में इफ्तार की रौनक देखने को मिल रही है।


इफ्तार का समय

आज 20 फरवरी को जुमे की नमाज अदा की जाएगी, जो इस्लाम में विशेष महत्व रखती है। रोजेदार दिनभर सब्र और परहेज के साथ इबादत में लगे रहते हैं और शाम को निर्धारित समय पर इफ्तार करते हैं। विभिन्न शहरों में सेहरी और इफ्तार का समय अलग-अलग है।

देश के प्रमुख शहरों में इफ्तार का समय

दिल्ली में इफ्तार 06:16 PM पर होगा। नोएडा में भी इफ्तार का समय 06:16 PM है, जबकि लखनऊ में यह 06:03 PM और जयपुर में 06:23 PM है। मुंबई में रोजेदार 06:52 PM पर इफ्तार करेंगे, वहीं पुणे में यह 06:37 PM पर होगा। कोलकाता में इफ्तार 05:37 PM, पटना में 05:46 PM और रांची में 05:48 PM पर होगा।


दूसरे रोजे का महत्व

दूसरे रोजे की अहमियत

रमजान के पहले दस दिन रहमत के माने जाते हैं। दूसरा रोजा आत्म-नियंत्रण और सब्र का संदेश देता है। मौलानाओं के अनुसार, रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी इच्छाओं पर काबू पाने की साधना है। इसे अल्लाह की दया प्राप्त करने और आत्मशुद्धि का अवसर भी माना जाता है।


जुमे की नमाज का महत्व

जुमे की नमाज का महत्व

इस्लाम में पांच वक्त की नमाज फर्ज है, लेकिन जुमे की नमाज को विशेष महत्व दिया गया है। कहा जाता है कि इस दिन की इबादत हफ्ते भर की गलतियों की माफी का जरिया बनती है। जुमा का अर्थ ही इकट्ठा होना है, इसलिए मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ नमाज अदा करते हैं।


रोजा रखने के दौरान ध्यान देने योग्य बातें

सबसे छोटा और लंबा रोजा

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार पहला रोजा लगभग 13 घंटे 34 मिनट का रहा। सबसे छोटा रोजा लगभग 12 घंटे 46 मिनट का होगा। 29वें रोजे की सेहरी सुबह 05:02 बजे और इफ्तार शाम 06:31 बजे होगा। वर्ष 2016 में सबसे लंबा रोजा 15 घंटे 45 मिनट का दर्ज किया गया था।

रोजा रखते समय क्या रखें ध्यान

रोजा शुरू करने से पहले सही नीयत और सेहरी जरूरी मानी जाती है, जिससे दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। गुस्से, झूठ और चुगली से बचते हुए इबादत और दुआ में समय बिताने की सलाह दी जाती है। इफ्तार के समय अल्लाह का शुक्र अदा करना रोजे की रूह माना जाता है।