रामेश्वरम मंदिर: दक्षिण भारत का पवित्र ज्योतिर्लिंग
रामेश्वरम मंदिर का महत्व
रामेश्वरम, जो तमिलनाडु के रामानाथपुरम जिले में स्थित है, 12 ज्योतिर्लिंगों में से 11वें स्थान पर आता है। यह मंदिर रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है और इसे दक्षिण भारत का काशी भी कहा जाता है। यहाँ भगवान रामनाथस्वामी की पूजा की जाती है, जो अपनी भव्यता, जटिल मूर्तिकला और विशाल मीनारों के लिए प्रसिद्ध है।
विशाल मूर्तियाँ और देवता
इस मंदिर में नंदी की एक विशाल मूर्ति है, जिसकी ऊँचाई लगभग 17.5 फीट है। यहाँ भगवान शिव के साथ देवी विशालाक्षी, भगवान विनायक, भगवान सुब्रह्मण्य, पर्वतवर्धिनी, उत्सव प्रतिमा, सायनागृह और पेरुमल की भी पूजा होती है।
भक्तों के लिए विशेष स्थान
यह मंदिर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित किया गया था और इसे भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए समर्पित किया गया है। रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। वर्तमान मंदिर की संरचना का निर्माण 17वीं शताब्दी में विभिन्न राजाओं द्वारा किया गया था, जिसमें श्रीलंका के राजाओं का भी योगदान शामिल है।
रामायण से जुड़ी कथा
भारतीय महाकाव्य रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद महादेव की पूजा करने का निर्णय लिया। उन्होंने हनुमान जी से काशी से शिवलिंग लाने का अनुरोध किया। जब हनुमान जी ने देरी की, तो माता सीता ने रेत से शिवलिंग बनाया, जिसे रामलिंगम कहा जाता है। काशी से लाए गए शिवलिंग को विश्वलिंगम कहा जाता है।
पवित्र जल निकाय
इस मंदिर के अंदर 22 तीर्थम हैं, जहाँ भक्त अपने पापों के प्रायश्चित के लिए स्नान करते हैं।