शनि जयंती 2023: विशेष उपाय और पूजा विधि
16 मई को शनि जयंती का पर्व मनाया जाएगा, जो मेहनती और सच्चे लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन शनि देव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति और आर्थिक समस्याओं से राहत मिल सकती है। जानें शनि जयंती पर किए जाने वाले विशेष उपाय, जैसे पीपल की पूजा, जल अर्पित करना, और पत्तों पर मंत्र लिखना। इसके अलावा, पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें भी जानें।
May 15, 2026, 19:19 IST
शनि जयंती का महत्व
16 मई को शनि जयंती का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव उन लोगों के रक्षक माने जाते हैं जो मेहनती और ईमानदार होते हैं। जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन कष्टों से मुक्ति पाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
शनि देव और पीपल का संबंध
शास्त्रों में उल्लेख है कि पीपल के पेड़ की जड़ में शनि देव का निवास होता है। इसलिए, शनि जयंती पर पीपल की पूजा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। यह उपाय न केवल आर्थिक समस्याओं से छुटकारा दिलाते हैं, बल्कि शत्रुओं के भय को भी समाप्त करते हैं।
शनि जयंती पर विशेष उपाय
जल अर्पित करें: सुबह स्नान के बाद पीपल की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और साफ पानी चढ़ाएं। जल अर्पित करते समय 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का 11 बार जाप करें। इससे जीवन में स्थिरता आती है।
सरसों के तेल का दीपक: शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं। दीये में कुछ काले तिल और एक सिक्का डालें, फिर पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें। इससे विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है।
108 परिक्रमा: शनि दोष या महादशा से मुक्ति के लिए पीपल की 108 बार परिक्रमा करें और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। यह उपाय स्वास्थ्य और आयु के लिए लाभकारी माना जाता है।
पत्तों पर मंत्र लिखें: पीपल के 11 पत्तों पर हल्दी से शनि देव का मंत्र लिखकर उन्हें पेड़ की जड़ में अर्पित करें। इससे धन संकट दूर होता है और अटके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति: पीपल की जड़ में तिल, गुड़ और एक सिक्का चढ़ाकर मौली बांधें। इससे पितृ दोष शांत होता है और आपके कर्मों का शुभ फल मिलने लगता है।
पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
शनि जयंती की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है। पीपल की पूजा सुबह या शाम किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन ध्यान रखें कि पेड़ को कोई नुकसान न पहुंचे। जो लोग इस दिन व्रत रख रहे हैं, उन्हें फलाहार करना चाहिए। इसके साथ ही, अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को दान देना न भूलें, क्योंकि शनि देव दान और सेवा से जल्दी प्रसन्न होते हैं।