सोम प्रदोष व्रत: पूजा विधि और महत्व
सोम प्रदोष व्रत, जो सावन के महीने में आता है, भगवान शिव की पूजा का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस व्रत का पालन करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। जानें इस व्रत की तिथि, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में। 10 अगस्त को मनाए जाने वाले इस व्रत में शिवलिंग का अभिषेक और मंत्र जाप का विशेष महत्व है।
Aug 10, 2026, 09:54 IST
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। इस माह में आने वाले व्रत पुण्यदायी माने जाते हैं, जिनमें प्रदोष व्रत का स्थान विशेष है। यह व्रत सोमवार को मनाया जाता है और इसे सोम प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र और भांग-धतूरा अर्पित करना चाहिए। शिव मंत्रों का जाप करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत से वैवाहिक जीवन में सुख, संतान सुख और रोगों से मुक्ति मिलती है। इस वर्ष सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त को मनाया जाएगा।
तिथि और मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त को सुबह 8 बजे से शुरू होगी और 11 अगस्त को 4:55 बजे समाप्त होगी। सोम प्रदोष व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:05 से 9:14 बजे तक रहेगा। इस समय पूजा करना फलदायी माना जाता है।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, फल, सुपारी, इलायची, लौंग, धूप, दीप, फूल, गंध, चावल और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान घी और शक्कर से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। प्रदोष व्रत कथा पढ़ें और पूजा के अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें। पूरे दिन व्रत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण करें और शाम को फिर से स्नान करके प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा करें।
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। सावन में प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल वह समय है जब भगवान शिव कैलाश पर तांडव करते हैं और सभी देवी-देवता उनकी आराधना करते हैं। प्रदोष व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों का अंत होता है।