×

हनुमान जयंती 2026: जानिए अनोखे मंदिर में हनुमान जी और उनकी पत्नी की पूजा

हनुमान जयंती 2026 के अवसर पर, देशभर में भक्तजन हनुमान जी की पूजा कर रहे हैं। इस विशेष दिन पर तेलंगाना के खम्मम जिले में स्थित श्री सुवर्चला सहिता हनुमान मंदिर की अनोखी परंपरा की चर्चा हो रही है, जहां हनुमान जी को उनकी पत्नी सुवर्चला देवी के साथ पूजा जाता है। जानें इस मंदिर की विशेषता, सुवर्चला देवी का परिचय और हनुमान जी के विवाह की पौराणिक कथा। यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
 

हनुमान जयंती 2026 का उत्सव


हनुमान जयंती 2026: आज देशभर में हनुमान जयंती का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। चैत्र पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर भक्तजन हनुमान जी की पूजा कर सुख और शांति की कामना करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी माना गया है, जिन्होंने कभी गृहस्थ जीवन नहीं अपनाया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां हनुमान जी अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं?


इस मंदिर की विशेषता

तेलंगाना के खम्मम जिले के येल्लांडु (एलंदु) गांव में स्थित श्री सुवर्चला सहिता हनुमान मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां हनुमान जी के साथ उनकी पत्नी सुवर्चला देवी की भी पूजा की जाती है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यह देश का एकमात्र मंदिर है जहां हनुमान जी दांपत्य रूप में पूजे जाते हैं।


यह मंदिर 2006 में स्थापित किया गया था। हर साल ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी को हनुमान जी के विवाह उत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है। उत्तर भारत में हनुमान जी को ब्रह्मचारी के रूप में पूजा जाता है, लेकिन इस मंदिर की परंपरा भक्तों को आकर्षित करती है।


सुवर्चला देवी का परिचय

मान्यता के अनुसार, सुवर्चला देवी सूर्य देव की पुत्री थीं, जो सूर्य की किरणों से प्रकट हुईं। हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरु मानकर उनसे शिक्षा प्राप्त की। सूर्य देव के पास नौ प्रकार की विद्याएं थीं, जिनमें से हनुमान जी ने पांच का ज्ञान प्राप्त किया, लेकिन बाकी चार विद्याओं को सीखने के लिए सूर्य देव ने एक शर्त रखी।


हनुमान जी का विवाह कैसे हुआ?

सूर्य देव ने बताया कि शेष विद्याएं केवल गृहस्थ जीवन जीने वाले व्यक्ति को ही दी जा सकती हैं। चूंकि हनुमान जी ब्रह्मचारी थे, इसलिए वे इन विद्याओं को प्राप्त नहीं कर सकते थे। तब सूर्य देव ने सुझाव दिया कि यदि हनुमान जी विवाह कर लें, तो वे शेष ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। हनुमान जी शुरू में सहमत नहीं हुए, लेकिन सूर्य देव ने समझाया कि उनकी पुत्री सुवर्चला से विवाह करने के बाद भी वे ब्रह्मचर्य का पालन कर सकते हैं।


इस पर हनुमान जी तैयार हो गए और उनका विवाह सुवर्चला देवी से हुआ। विवाह के बाद हनुमान जी ने शेष विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया, जबकि सुवर्चला देवी ने तपस्या का मार्ग अपनाया।


भक्तों की आस्था

इसी पौराणिक कथा के कारण भक्त इस मंदिर में विशेष आस्था रखते हैं। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और हनुमान जी तथा सुवर्चला देवी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर यह अनोखा मंदिर हमें याद दिलाता है कि भक्ति के रूप अनेक हो सकते हैं, लेकिन श्रद्धा एक ही होती है।