हनुमान जयंती 2026: सुवर्चला देवी के साथ पूजा का अनोखा मंदिर
हनुमान जयंती 2026:
आज, 2 अप्रैल को, हनुमान जयंती के पावन अवसर पर, देशभर में भक्तजन हनुमान जी की आराधना बड़े उत्साह के साथ कर रहे हैं। हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी के रूप में पूजा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी की पूजा उनकी पत्नी सुवर्चला देवी के साथ की जाती है? यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।
इस मंदिर में अपनी पत्नी के साथ पूजे जाते हैं बजरंगबली
यह विशेष मंदिर तेलंगाना राज्य के खम्मम जिले के एलंदु गांव में स्थित है। इसे श्री सुवर्चला सहिता हनुमान मंदिर कहा जाता है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यह पूरे भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी को उनकी पत्नी के साथ पूजा जाता है। इस मंदिर का निर्माण 2006 में हुआ था, और तब से यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
हनुमान जयंती पर जानें इसके पीछे की कथा
शास्त्रों में हनुमान जी को ब्रह्मचारी बताया गया है, फिर भी इस मंदिर में उनकी पत्नी सुवर्चला की पूजा का कारण एक रोचक कथा है। कहा जाता है कि हनुमान जी ने भगवान सूर्य को अपना गुरु बनाया था और उनसे शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा जताई थी। सूर्य देव के पास नौ प्रकार की विद्याएं थीं। हनुमान जी ने पांच विद्याओं का ज्ञान आसानी से प्राप्त कर लिया, लेकिन जब उन्होंने बाकी चार विद्याओं को सीखने की इच्छा जताई, तो सूर्य देव ने एक शर्त रखी।
सूर्य देव ने दिया था उपाय
चूंकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे, इसलिए यह शर्त पूरी करना उनके लिए संभव नहीं था। तब सूर्य देव ने उन्हें एक उपाय बताया। उन्होंने कहा कि यदि हनुमान जी विवाह कर लें, तो उन्हें शेष विद्याएं सिखाई जा सकती हैं। हनुमान जी शुरू में इसके लिए तैयार नहीं हुए, लेकिन सूर्य देव ने आश्वासन दिया कि उनकी पुत्री सुवर्चला से विवाह करने के बाद भी वे अपना ब्रह्मचर्य व्रत पूरी तरह से निभा सकते हैं। हनुमान जी इस शर्त पर सहमत हो गए।
हनुमान जी को सुवर्चला सहिता रूप में किया गया स्थापित
सूर्य देव ने अपनी पुत्री सुवर्चला का विवाह हनुमान जी से कर दिया। इस विवाह के बाद, सूर्य देव ने हनुमान जी को बची हुई चार विद्याओं का ज्ञान भी दे दिया। इसी पौराणिक कथा के आधार पर एलंदु गांव के इस मंदिर में हनुमान जी को सुवर्चला सहिता रूप में स्थापित किया गया है। भक्त मानते हैं कि यहां दर्शन करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। कई लोग अपनी शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि बढ़ाने के लिए भी यहां आते हैं।