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हरतालिका तीज व्रत: पूजा सामग्री और दान की आवश्यकताएँ

हरतालिका तीज व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जो विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पतियों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाता है। इस लेख में, हम इस व्रत की पूजा सामग्री, भोग और दान की आवश्यकताओं के बारे में विस्तार से जानेंगे। जानें कि इस दिन क्या-क्या सामग्री शामिल करनी चाहिए ताकि आपकी पूजा और व्रत पूर्ण हो सके।
 

हरतालिका तीज का महत्व

हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष, यह व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह व्रत रखा जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत करती हैं।


पूजा का विधान

इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार का सामान भी भेंट किया जाता है। पूजा और दान में कुछ महत्वपूर्ण चीजों का होना आवश्यक है, क्योंकि इनके बिना व्रत अधूरा रह सकता है।


हरतालिका तीज पूजा सामग्री

पूजा सामग्री की सूची:


- भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति के लिए गीली मिट्टी या बनी हुई प्रतिमा


- भगवान के वस्त्र


- मिट्टी के दीपक


- देवी पार्वती के श्रृंगार का सामान


- लकड़ी की चौकी


- लाल या पीला वस्त्र


- मिट्टी का कलश और उसका ढक्कन


- पानी वाला नारियल


- जनेऊ


- गुलाल


- सिंदूर


- घी


- शहद


- भस्म


- रोली


- लौंग


- इलायची


- चावल


- कलावा


- सुपारी


- कपूर


- धूपबत्ती


- दीपक के लिए रूई की बत्ती


हरतालिका तीज भोग सामग्री

धार्मिक मान्यता के अनुसार, तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती को कुछ आवश्यक चीजें अर्पित करनी चाहिए। इस दिन भोग के लिए 5 प्रकार के मौसमी फल और मिठाइयाँ अवश्य रखें। इसके अलावा, पान का पत्ता, गणेश जी का प्रिय दूर्वा, शिव जी का प्रिय बेलपत्र, गेंदे के फूल, शमी यंत्र, भांग पत्र, गुलाब के फूल, धतूरे का फल, तुलसी मंजरी, फूल और आम के पत्ते भी पूजा में शामिल करें।


पंचामृत सामग्री

इस दिन पंचामृत बनाने के लिए गाय का दूध, दही, शहद, शक्कर और पंचमेवा का उपयोग करना चाहिए। धार्मिक कार्यों और व्रत में पंचामृत का विशेष महत्व है।


हरतालिका तीज का दान सामग्री

हरतालिका तीज पर विवाहित महिलाएं सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, आलता, कंघा, काजल, बिछिया, चूड़ियां, कुमकुम, अबीर, चंदन और काजल जैसी श्रृंगार सामग्री किसी अन्य सुहागिन महिलाओं को भेंट करती हैं। ऐसा करने से दांपत्य जीवन में तनाव कम होता है और रिश्तों में प्रेम बना रहता है। व्रती महिलाओं को इस दिन सोलह श्रृंगार करना चाहिए और हाथों में मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है।