हरसिद्धि माता शक्तिपीठ: उज्जैन का प्रमुख धार्मिक स्थल
हरसिद्धि माता शक्तिपीठ का महत्व
भारत के विभिन्न हिस्सों में देवी सती के शक्तिपीठों की स्थापना की गई है। देवी सती के शरीर के अंगों से 51 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ, जिनमें उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के निकट स्थित है और नवरात्रि या अन्य विशेष अवसरों पर यहां का दृश्य अत्यंत भव्य होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरसिद्धि माता के दर्शन के लिए यहां आते हैं। इस लेख में हम हरसिद्धि मंदिर की कथा और इसके महत्व के बारे में जानकारी साझा करेंगे।
हरसिद्धि माता का शक्तिपीठ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी सती के शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वे सभी स्थान शक्तिपीठ बन गए। हरसिद्धि माता मंदिर उस स्थान पर स्थित है, जहां देवी सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। इसे शक्ति का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
हरसिद्धि माता की कथा
उज्जैन के पवित्र स्थलों में हरसिद्धि माता शक्तिपीठ का विशेष स्थान है। यहां महासरस्वती और महालक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित हैं, और मां अन्नपूर्णा की मूर्ति भी इन मूर्तियों के बीच में है। शिव पुराण के अनुसार, जब भगवान शिव देवी सती के जलते शरीर को यज्ञ की अग्नि से उठाकर ले जा रहे थे, तब उनकी दाहिनी कोहनी यहां गिरी थी, जिसके बाद इस स्थान पर हरसिद्धि माता शक्तिपीठ का निर्माण हुआ।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव और देवी पार्वती कैलाश पर्वत पर थे, तभी दो राक्षस चंड और प्रचंड ने उनके पास आने का प्रयास किया। भगवान शिव ने देवी चंडी को बुलाया, जिन्होंने राक्षसों का वध किया। इस पर महादेव ने देवी चंडी को विजय प्राप्त करने वाली का नाम दिया।
हरसिद्धि माता मंदिर का पुनर्निर्माण मराठा काल में हुआ था। मंदिर में दो स्तंभ हैं, जिन पर रोज शाम को दीपक जलाए जाते हैं। इस समय मंदिर का दृश्य अत्यंत आकर्षक होता है, जिसे देखने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।