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होलिका दहन पर अपनाएं ये 5 खास उपाय, पाएं सुख और समृद्धि

होलिका दहन, भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो न केवल रंगों का उत्सव है, बल्कि आध्यात्मिक महत्व भी रखता है। इस लेख में हम होलिका दहन की रात अपनाए जाने वाले पांच खास उपायों के बारे में जानेंगे, जो नकारात्मकता को दूर करने और जीवन में सुख और समृद्धि लाने में मदद कर सकते हैं। जानें कैसे विष्णु सहस्रनाम, ऋणमोचक मंगल स्तोत्र और अन्य उपाय आपके जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं।
 

होलिका दहन: रंगों का त्योहार और आध्यात्मिक महत्व


नई दिल्ली: होली, भारतीय संस्कृति का एक जीवंत और उत्सवपूर्ण त्योहार है, जो न केवल रंगों के खेल का अवसर प्रदान करता है, बल्कि इसका आध्यात्मिक महत्व भी गहरा है। होलिका दहन की रात, बुराई का प्रतीक होलिका को जलाने से नकारात्मक शक्तियों का अंत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। 2026 में, यह पर्व चंद्र ग्रहण के प्रभाव में भी अपनी चमक बनाए रखेगा। शास्त्रों के अनुसार, इस रात कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय करने से जीवन की पुरानी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं और नई शुरुआत हो सकती है। आइए जानते हैं इनमें से पांच विशेष उपाय।


विष्णु सहस्रनाम पाठ से दूर हों विघ्न

होलिका दहन की शाम भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत प्रभावी माना जाता है। यदि आपके जीवन में बार-बार रुकावटें आ रही हैं और प्रयास विफल हो रहे हैं, तो होलिका की अग्नि के समक्ष विष्णु सहस्रनाम या नारायण कवच का पाठ करें। शास्त्रों के अनुसार, इससे भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। अग्नि की लपटें नकारात्मकता को समाप्त करती हैं, जिससे घर-परिवार में शांति और समृद्धि का वास होता है। यह उपाय विशेष रूप से लंबे समय से परेशान लोगों के लिए लाभकारी साबित होता है।


कर्ज से मुक्ति के लिए ऋणमोचक मंगल स्तोत्र

आर्थिक तंगी और कर्ज का बोझ कई परिवारों के लिए चुनौती बन जाता है। होलिका दहन की रात, शुद्ध घी का दीया जलाकर हनुमान जी के सामने ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। ज्योतिष और शास्त्रों में इसे कर्जमुक्ति और मंगल दोष निवारण का प्रभावी उपाय बताया गया है। होलिका की पवित्र अग्नि इस पाठ को और भी शक्तिशाली बनाती है। इससे न केवल आर्थिक संकट कम होता है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ता है और जीवन में स्थिरता आती है।


नजर दोष दूर करने का सरल उपाय

कई बार बुरी नजर या ऊपरी बाधा से परिवार प्रभावित होता है। होलिका दहन की रात, एक मुट्ठी पीली सरसों और थोड़ा सा नमक लेकर प्रभावित व्यक्ति के चारों ओर उल्टी दिशा में घुमाएं। फिर इसे कागज में लपेटकर अग्नि में डाल दें। शास्त्रों में यह उपाय नजर और नकारात्मक ऊर्जा को जलाने वाला माना जाता है। उपाय के बाद होलिका की राख से तिलक लगाना भी शुभ फलदायी होता है, जो भाग्य में वृद्धि करता है।


चंद्रमा को अर्घ्य

चंद्रमा मन का कारक है। यदि चिंता, अनिद्रा या मानसिक अशांति बनी रहती है, तो पूर्णिमा की रात चंद्र दर्शन कर मिश्री युक्त दूध से अर्घ्य दें। शास्त्र इस उपाय को चंद्र दोष निवारण और मन की शांति के लिए सर्वोत्तम मानते हैं। होलिका दहन के बाद यह करने से तनाव दूर होता है और जीवन में संतुलन आता है। नींद की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह उपाय बहुत कारगर सिद्ध होता है।


परिवार की सुरक्षा के लिए गोबर की माला और लकड़ी

होलिका में गाय के गोबर के उपलों से बनी माला चढ़ाना और प्रत्येक सदस्य के नाम पर उपला डालना सुरक्षा का प्रतीक है। साथ ही, घर की कोई पुरानी लकड़ी अग्नि में डालें। शास्त्र होलिका की अग्नि को अत्यंत पवित्र मानते हैं। दहन के बाद परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना करें और राख से तिलक लगाएं। यह उपाय परिवार में एकता लाता है, पुरानी कड़वाहट खत्म करता है और नई सकारात्मक शुरुआत का संदेश देता है।